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भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव
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अर्थव्यवस्था का सफ़र
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव

भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव

 

भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव

आज़ादी के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था को इस मुकाम तक पहुँचने में भारी उतार चढ़ाव देखने पड़े हैं.

लेकिन 60 साल के सफ़र पर नज़र डालें तो यह सरपट दौड़ती नज़र आ रही है.

भारत में आर्थिक विकास की गति 9 फ़ीसदी से अधिक के स्तर पर चल रही है.

यही वजह है कि पूरी दुनिया भारतीय अर्थव्यवस्था की कायल हो गई है. पूरी दुनिया में चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जिसकी विकास दर भारत से ज़्यादा है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ यदि भारत की मौजूदा विकास दर जारी रहती है तो एक दशक के भीतर भारतीय अर्थव्यवस्था इटली, फ्रांस और ब्रिटेन से आगे होगी.

आकलन तो यह भी है कि इस सदी के मध्य तक भारतीय अर्थव्यवस्था अमरीका से भी आगे निकल सकती है.

दरअसल, 1991 में उदारीकरण और आर्थिक सुधार की नीति लागू होने के बाद भारत में बहुत तेज़ी से आर्थिक प्रगति हुई और भारत एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है.

भारतीय अर्थव्यवस्था में आई तेज़ी और शेयर बाज़ार से मिलते फ़ायदों की वजह से भारत में करोड़पतियों की संख्या एक लाख का आँकड़ा पार कर गई है.

लेकिन तेज़ रफ़्तार आर्थिक विकास के बावजूद भारत की 22 फ़ीसदी से ज़्यादा आबादी अब भी ग़रीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है.

साथ ही कृषि क्षेत्र में ख़ास प्रगति होती नहीं दिखाई दे रही है और कृषि विकास दर महज 2.7 फ़ीसदी पर अटकी हुई है जबकि खेती पर भारत की 65 फ़ीसदी से ज़्यादा आबादी निर्भर है.
 
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