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![]() विज्ञान 2003 इस बात की पूरी संभावना है कि वर्ष 2003 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिहाज़ से ऐतिहासिक माना जाएगा. इतिहास से भी यह सीधे जुड़ा रहा क्योंकि इसे राइट बंधुओं की पहली उड़ान का शताब्दी वर्ष, एवरेस्ट पर मानव क़दम पड़ने का स्वर्ण जयंती वर्ष और पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जुबली वर्ष बनने का सौभाग्य मिला.
कोलंबिया अंतरिक्ष शटल के हादसे से स्तब्ध दुनिया को इस साल अंतरिक्ष और वैमानिकी के क्षेत्र में कई उपलब्धियों से रूबरू होने का मौक़ा मिला. चीन ने अपने बलबूते मानव को अंतरिक्ष में भेज कर सनसनी मचा दी. वहीं अमरीका और रूस जैसी पारंपरिक अंतरिक्ष ताक़तों के अलावा यूरोपीय संघ, जापान और ब्रिटेन ने भी मंगल ग्रह पर जीवन और पानी की थाह लेने के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की घोषणा की. मानव निर्मित दो यानों ने हमसे विदा ली. पायोनियर-10 ने तो बारह अरब मील दूर जा कर संदेश भेजना बंद कर दिया, जबकि गैलीलियो यान चौदह साल की यात्रा के बाद बृहस्पति के वायुमंडल से जा टकराया. शटल हादसे में कल्पना चावला की मौत के ग़म में डूबे भारतीयों को प्रधानमंत्री वाजपेयी के इस हौसले से ढाढ़स बँधी की उनका देश चंद्र अभियान शुरू करने पर काम कर रहा है. इराक़ युद्ध ने दुनिया को दिखा दिया की बड़ी-बड़ी सेनाएँ रखने का ज़माना लद चुका है, और अब 'स्मार्ट' हथियारों से सजी छोटी-छोटी सैन्य टुकड़ियों के बल पर सफल युद्ध लड़ा जा सकता है. इसने यह भी बता दिया कि परंपरागत हथियारों से लड़े जाने वाले भावी युद्धों में जानमाल की हानि बहुत ही सीमित हुआ करेगी. कंप्यूटर वायरसों और अनचाही ईमेलों ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बनाए रखा. कंप्यूटर वायरसों ने अपनी ज़िंदगी के बदनामी भरे 20 साल पूरे किए. जहाँ एक ओर मोबाइल फ़ोनों और कंप्यूटरों के बीच की खाई कम हुई, वहीं कैमरा फ़ोनों ने प्राइवेसी संबंधी कई सवालों को जन्म दिया. स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह साल सार्स और एचआईवी-एड्स का रहा. निमोनिया जैसी बीमारी सार्स ने क़रीब 800 लोगों की जान लेने के साथ-साथ पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था को और चीन की राजनीति को झकझोरा. इसने यह भी दिखाया कि ज़रूरत पड़ने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन कितना प्रभावी साबित हो सकता है. इस साल घोड़े और चूहे के क्लोन बनाए गए, साथ ही मानव क्लोनिंग का भी दावा सामने आया. क्लोनेड नामक संगठन के इस दावे ने मनुष्यों की क्लोनिंग की नैतिकता को लेकर जारी बहस में तेज़ी ला दी. जैविक हथियारों के ख़तरे ने विभिन्न बीमारियों के टीके विकसित किए जाने को दुनिया की प्राथमिकता सूची में ला दिया. कैंसर, टीबी और मलेरिया जैसी पारंपरिक बीमारियों से जारी लड़ाई के बीच इस साल एचआईवी-एड्स के ख़िलाफ़ जागरुकता बढ़ाने का अभियान बहुत आगे बढ़ा. मंडेला, क्लिंटन और गेट्स जैसी शख़्सियतों ने इसके लिए बहुत सक्रियता दिखाई. पर्यावरण के क्षेत्र में यह साल कोई उत्साहजनक नहीं माना जा सकता. अमरीका के बाद अब रूस ने भी ग्लोबल वार्मिंग के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय उपाय के रूप में प्रस्तुत क्योटो संधि की पुष्टि करने से इनकार कर दिया. जीन परिवर्तित उत्पादों को लेकर निश्चय ही कुछ सहमति बनने के आसार दिखे. यूरोपीय संसद ने अंतत: जीएम उत्पादों को सदस्य देशों के बाज़ार में उतारने का प्रस्ताव पारित कर दिया. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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