कोरोना वायरस संकट में अंतरिक्ष यात्रियों से सीखें कैसे रहें अकेले

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कोविड-19 की महामारी से लड़ने के लिए अभी तक कोई दवा नहीं बनी है. दुनिया भर में लाखों लोग इसकी चपेट में हैं. और डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग कोरोना से ज़िंदगी की जंग हार चुके हैं. फ़िलहाल इससे लड़ने का एक मात्र रास्ता है आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग.
जिन लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं हैं, लेकिन कोरोना संक्रमित होने का शक है, डॉक्टर उन्हें एकांत में रहने का मशविरा दे रहे हैं. लेकिन अकेले रहना भी कोई आसान काम नहीं है.
लोगों की शिकायत है कि अकेले रह कर समय बिताना बहुत मुश्किल काम है. लेकिन आइसोलेशन में रहने वाले आप पहले व्यक्ति नहीं हैं. ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने बहुत से काम पूरा करने के लिए ख़ुद को सारी दुनिया से अलग कर लेते हैं. इसकी बेहतरीन मिसाल हैं, अंतरिक्ष यात्री. तो चलिए क्यों न ऐसे ही लोगों से आइसोलेशन में रहने के गुर सीखे जाएं.
सबसे पहले बात करते हैं केजेलल लिंडग्रेन की जो 2015 में अपने पांच साथियों के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर रहने गए थे. दूसरी हैं जोसलिन डुन जिन्होंने 2014 से 2015 के दौरान अपने पांच साथियों के साथ हवाई स्पेस एक्सप्लोरेशन एनॉलॉग एंड सिम्युलेशन (Hi-Seas) में आठ महीने का समय बिताया था.
जो लोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रहते हैं, उनकी दिनचर्या बहुत सख़्त होती है. खाने से लेकर कसरत करने और इंजीनियरिंग के काम से लेकर कॉन्फ़्रेंस कॉल तक का समय तय रहता है. इसमें शायद ही कभी मुश्किल से पांच मिनट का फ़र्क़ आता है.
लिंडग्रेन कहते हैं कि अगर आपको घर से काम करने का मौक़ा मिल रहा है, तो ये आपके लिए किसी तोहफ़े से कम नहीं है. आप घर पर रहकर ऑफ़िस के काम के साथ अपने कुछ निजी कामों के लिए भी समय निकाल सकते हैं. इसके लिए आपको वरीयता के आधार पर अपनी दिनचर्या तय करनी होगी.
लिंडग्रेन इन दिनों अपने घर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं. घर में उनके तीन बच्चे और पत्नी हैं. वो अपने बच्चों से हफ़्ते में एक बार बात करते हैं और अगले हफ़्ते में पूरे करने वाले कामों के बारे में बात करते हैं. साथ ही वो बच्चों से रोज़ के कामों के साथ कुछ क्रिएटिव कामों के लिए समय निकालने को भी कहते हैं.
जोसलिन डन कहती हैं कि जब वो Hi-Seas में काम करती थीं, तो अपने साथियों के साथ एक काम पूरा करने के बाद ग्रुप में काम करने लगती थीं. इसी तरह आप ज़रूरी काम के बाद पसंद का कोई और काम कर सकते हैं. मिसाल के लिए अगर आपने दो घंटे ऑफ़िस का काम किया है, तो फिर दूसरा काम शुरू करने से पहले आप व्यायाम कर सकते हैं. इससे आपको काम से ब्रेक भी मिल जाएगा और पसंद का काम भी हो जाएगा. इसके लिए आपको अपना शेड्यूल अलग-अलग हिस्सों में बांटना होगा.
Hi-Seas का अनुभव बताते हुए जोसलिन डन कहती हैं कि उनकी टीम के चार, आठ और 12 महीने के मिशन थे. सभी ने अपना दिन अलग-अलग कामों के लिए बांटा हुआ था. जैसे वो आठ घंटे सोते थे. तीन से चार घंटे अपनी पसंद का कोई काम करते थे या फिर सब मिलकर हंसी मज़ाक़ करते थे. दो घंटे खाने पर ख़र्च करते थे और आधा घंटा नहाने धोने के लिए रखते थे. बाक़ी का सारा समय वो अपने मिशन पर काम करते थे.

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लिंडग्रेन कहते हैं कि अगर काम करते समय आप से कोई ग़लती हो जाए तो, उसके लिए ख़ुद को कुसूरवार मत मानिए. अपना मूड ख़राब मत कीजिए. अगर नकारात्मक भावना आ जाएगी तो उसका असर दूसरे कामों पर भी पड़ेगा. अपने अनुभव साझा करते हुए वो कहते हैं कि एक मिशन के दौरान किसी मशीन को ठीक करते समय उन्होंने कोई गड़बड़ी कर दी थी. इस काम में उन्हें तीन घंटे का समय लगा था.
लेकिन अपनी ग़लती ठीक करने के लिए उन्हें फिर से पूरी मशीन खोलकर नए सिरे से काम करना पड़ा. इस बात से वो बहुत निराश हुए थे. लेकिन, उनकी टीम के अन्य साथियों ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि अपना अनुभव दूसरों से साझा करो ताकि इस ग़लति से दूसरों को नई सीख मिले. ज़िंदगी में हरेक ग़लती नया अनुभव और सीख देती है.
लिंडग्रेन के मुताबिक़ अपनी और अपने साथियों की उम्मीदों पर खरा उतरना और उन्हें पूरा करना हमारा लक्षय होना चाहिए. इसके लिए साथियों के साथ लगातार संवाद रखना ज़रुरी है.
इसी तरह ड्यून अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि Hi-Seas में उन्होंने घरेलू काम साथियों के साथ बांट रखे थे. लेकिन रविवार के दिन सभी साथी एक साथ बैठ कर बात करते थे और बताते थे कि पिछला सप्ताह कैसा रहा. जो काम इस हफ़्ते नहीं हो पाए या ठीक नहीं हुए, उन्हें अगले सप्ताह में कैसे पूरा किया जाए. अगर किसी के दिल में कोई कुंठा है तो वो भी खुलकर साझा करते थे. कहने का मतलब ये है कि टीम के सदस्यों के बीच लगातार संवाद होना ज़रुरी है.
लिंडग्रेन कहते हैं कि स्पेस स्टेशन हमारा घर भी था और दफ़्तर भी. ठीक इसी तरह आज हमारे घर हो गए हैं. हम अपने परिवार के साथ घर में रह भी रहे हैं और ऑफ़िस का काम भी कर रहे हैं. स्पेस स्टेशन में वो काम के साथ खूब मौज मस्ती भी करते थे. क्योंकि रचनात्मक कामों के लिए ये बहुत ज़रुरी है.
इसी तरह आप भी घर पर काम के साथ अपना मनोरंजन भी कीजिए. स्पेस स्टेश में वो सप्ताह में एक दिन साथियों के साथ कोई ना कोई खेल ज़रुर खेलते थे. और अब भी वो अपने घर में परिवार के साथ सप्ताह में एक दिन टीवी शो देखते हैं. वीडियो कॉन्फ़्रेसिंग के माध्यम से अपने रिश्तेदारों और साथियों से बातें करते हैं.

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पूर्व नासा एस्ट्रोनॉट स्कॉट केली इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में एक साल गुज़ार चुके हैं. उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि स्पेस स्टेशन में वो ख़ुद को तरो-ताज़ा रखने के लिए अपनी पसंद का कोई ना कोई काम ज़रुर करते थे. वही जोसलिन कहती हैं कि कुछ समय एकांत में रहने के लिए निकालना भी ज़रुरू है. वो Hi-Seas में अपने लिए आधा घंटा तो निकालती ही थीं.
लिंडग्रेन कहती हैं कि ज़्यादा काम और तनाव से मुक्ति के लिए कसरत बहुत ज़रुरी है. जिस वातावरण में आजकल हम सभी रह रहे हैं, उसमें तो इसकी ज़रुरत और भी बढ़ जाती है. जिस समय वो स्पेस में थे तब भी वर्ज़िश ज़रुर करते थे. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से आप बाहर जाकर चहलक़दमी नहीं कर सकते तो क्या हुआ. आजकल इंटरनेट पर बहुत तरह के योग, एक्सरसाइज़ के वीडियो मौजूद हैं उनकी मदद लीजिए.
सोशल आइसोलेशन में हमारी सामाजिक ज़िंदगी रुक जाती है. इंसान एक सामाजिक प्राणी है. लोगों से मिलना उनसे बातें करना एक दूसरे के नज़दीक जाकर उनकी मौजूदगी महसूस करना उसकी प्रवृत्ति है. ऐसे में जब हम घरों में बंद है तो तनाव का स्तर बढ़ना लाज़मी है. ठीक उसी तरह जैसे उनके साथियों ने Hi-Seas पर जाते समय महसूस किया था. शुरुआत में ही सबको तनाव और जोश दोनों था.

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लेकिन मानसिक रुप से वो थके हुए नहीं थे. धीरे-धीरे ये तनाव दोनों तरह से नज़र आने लगा. लोगों ने अपने सोने का समय बदल दिया, वो एक दूसरे से कतराने लगे. जोसलिन कहती हैं तनाव का स्तर मापने के लिए कई तरह के तकनीकी उपकरण हैं. लेकिन आप उनके बिना भी इसे माप सकते हैं. नींद आने के बावजूद अगर आप सो नहीं पा रहे हैं, तो इसका मतलब है तनाव का स्तर बढ़ रहा है. इसके लिए आपको अपने रूटीन में थोड़ा बदलाव लाना होगा.
शुरुआत में लोगों ने लॉकडाउन, सोशल आईसोलेशन को कुछ दिन की प्रक्रिया मानकर रहना शुरु कर दिया था लेकिन ये अभी कितने दिन और चलेगा कहना मुश्किल है. ऐसे में हो सकता है घर में रह रहे लोगों के बीच तनाव इतना बढ़ जाए की आपस में परिवार के लोगों के साथ नोक झोंक शुरु हो जाए. ठीक उसी तरह जैसे उनके मिशन के दौरान हुई थी. तनाव का बढ़ना स्वाभाविक है लेकिन उससे जीतना भी हमारी ही ज़िम्मेदारी है. जहां तक हो सके नोक झोंक और झगड़ों से दूर रहें.
लिंडग्रेन कहते हैं जब हम मिशन पर जाते हैं तो हमें पता होता है कि कितने दिन में हमें वापस आना है. ये भी हो सकता है कि किसी वजह से हमें बीच में ही बुला लिया जाए. लेकिन हम कभी भी अपने वापसी के दिन नहीं गिनते. इसी तरह आप भी इस मुश्किल समय में ख़ुद को दिमाग़ी तौर पर लंबे समय के लिए आसोलेशन के लिए तैयार रखिए. ये कब ख़त्म होगा इसके दिन गिनना छोड़ दीजिए. जब अचानक लॉकडाउन, आईसोलेशन ख़त्म होगा तो आपको अलग ही तरह की ख़ुशी होगी.

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