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श्रीलंकाई तमिलों के लिए हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के तमिलों की सुरक्षा की मांग को लेकर बुधवार को तमिलनाडु की कई छोटी राजनीतिक पार्टियों ने राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. इस हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने राज्य भर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं. स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि चूंकि इस हड़ताल में सत्ताधारी दल डीएमके और मुख्य विपक्षी दल एआईडीएमके शामिल नहीं है इसलिए इसका ज़्यादा असर दिखने की संभावना नहीं है. इससे पहले राज्य के सत्ताधारी दल डीएमके के सांसदों ने केंद्र सरकार पर श्रीलंका से बातचीत करने का दबाव बनाने के लिए इस्तीफ़े की पेशकश की थी. और उससे पहले तमिल फ़िल्म कलाकारों ने एक दिन का उपवास रखकर श्रीलंका के तमिलों के प्रति अपना समर्थन ज़ाहिर किया था. व्यापक सुरक्षा हड़ताल की आह्वान 'श्रीलंकाई तमिल प्रोटेक्शन फ़्रंट' ने किया है जिसमें पीएमके, एमडीएमके, सीपीआई, वीसीके और टीएनएम जैसी पार्टियाँ शामिल हैं. इसके अलावा इसमें कुछ छोटे संगठन शामिल हो रहे हैं. इस हड़ताल को देखते हुए राज्य सरकार ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चेन्नई में पुलिस महानिदेशक केपी जैन ने कहा, "राज्य भर में 85 हज़ार जवान तैनात किए जा रहे हैं. उनकी तैनाती रेलवे स्टेशनों और बस स्टेशनों पर की जाएगी." पुलिस महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान जो भी सामान्य जनजीवन में बाधा पहुँचाने का प्रयास करेगा उसके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू किया जाएगा. हालांकि चेन्नई में राजस्थान पत्रिका के स्थानीय संपादक दिलीप चारी का कहना है कि इस हड़ताल का ज़्यादा असर दिखाई देने की संभावना नहीं है क्योंकि जो राजनीतिक दल और संगठन इसमें हिस्सा ले रही हैं उनका प्रभाव क्षेत्र सीमित है. उनका कहना है कि सत्ताधारी दल डीएमके इसमें शामिल नहीं हो रहा है क्योंकि वह नहीं चाहता कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले जनता के बीच कोई ग़लत संदेश जाए. इसी तरह विपक्षी दल एआईडीएमके भी इससे दूर है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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