BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 17 मई, 2007 को 14:33 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
भारत में यातायात नियम और सख़्त होंगे
भारत में वाहन चलाना बहुत ख़तरनाक साबित हो सकता है
भारत में वाहन चलाना बहुत ख़तरनाक साबित हो सकता है
भारत में ड्राइविंग इतनी ख़तरनाक हो चुकी है कि सड़क पर वाहन ले जाते डर लगता है और हर साल हज़ारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवा देते हैं.

अब भारत सरकार ने यातायात नियम तोड़ने के मामलों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव करते हुए एक विधेयक संसद में पेश किया है जिसका मक़सद दिन प्रतिदिन ख़तरनाक होती जा रहा यातायात स्थिति को सुधारना है.

भारत में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करना तो दूर सामान्य अनुशासन और समझदारी भी नहीं दिखाते और इसी का नतीजा है कि वहाँ हर साल 90 हज़ार से ज़्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं.

आँकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में जितने लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं उनमें से आठ प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं. इस तरह भारत ऐसे देशों की सूची में काफ़ी ऊपर है जहाँ सड़क दुर्घटनाएँ बहुत ज़्यादा होती हैं.

एक अनुमान के अनुसार भारत में वाहन चलाने वालों यानी ड्राइवर्स की संख्या इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि इस समय प्रतिहज़ार पर सात के हिसाब बढ़ोत्तरी हो रही है जो वर्ष 2010 में प्रतिहज़ार पर 11 हो जाएगी. यह बढ़ोत्तरी वर्ष 2000 के मुक़ाबले दो गुनी हो जाएगी जब भारत में सिर्फ़ 0.5 प्रतिशत लोगों के पास कार हुआ करती थी.

सरकार ने अब जो नया विधेयक संसद में पेश किया है उसमें प्रस्ताव किया गया है कि निर्धारित सीमा से ज़्यादा गति से वाहन चलाने पर जुर्माना दस डॉलर यानी क़रीब 400 रुपए से बढ़ाकर 25 डॉलर यानी एक हज़ार रुपए किया जाएगा.

अगर कोई व्यक्ति शराब के नशे में वाहन चलाता हुआ पाया जाता है तो उसे छह महीने की जेल भी हो सकती है और पचास डॉलर यानी दो हज़ार रुपए जुर्माना हो सकता है.

इसी तरह के कुछ सख़्त नियम कुछ समय पहले राजधानी दिल्ली में लागू किए गए थे जिनका सड़कों पर असर भी नज़र आने लगा है और यातायात में ज़्यादा अनुशासन दिखता है.

भारत में पुल निर्माण
यातायात सुरक्षित बनाने के लिए बड़े-बड़े हाईवे बनाए जा रहे हैं

लेकिन कुछ लोगों को डर है कि नए सख़्त नियमों की वजह से भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि अक्सर पुलिस यातायात नियम तोड़ने वालों से रिश्वत लेकर उन्हें वहीं छोड़ देती है.

लापरवाह ड्राइविंग

भारत में सभी तरह की सड़कों पर हर तरह के वाहन चलते हैं, पैदल से लेकर साइकिल, ट्रैक्टर और तेज़ रफ़्तार कारें. ऐसा नज़र आता है कि विभिन्न आकार और रफ़्तार वाले वाहनों के बीच स्थान के लिए जद्दोजहद हो रही होती है.

बसें, कारें, तिपहिया, हाथ से खींचकर चलने वाली गाड़ियाँ सभी अपनी-अपनी जगह बनाकर अपनी रफ़्तार से चलते हैं और पशुओं को भला कोई कैसे रोक सकता है.

इतना ही नहीं, भारत की अर्थव्यवस्था में हो रही प्रगति का मतलब है कि निकट भविष्य में वाहनों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी होती रहेगी.

लेकिन बहुत से ड्राइवर सड़क दुर्घटनाओं को बिल्कुल भी गंभीर नहीं समझते और अक्सर सड़क दुर्घटनाएँ लापरवाही से वाहन चलाने की वजह से होती हैं.

बहुत से मामलों में ऐसा भी होता है कि वाहन चलाने का न तो कोई तजुर्बा है और न ही पर्याप्त अभ्यास किया है लेकिन जब ऐसे ड्राइवर किसी व्यस्त सड़क पर वाहन चलाने लगते हैं तो अक्सर मामलों में नतीजा दुर्घटना ही होता है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>