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'चुनाव से पहले राजशाही ख़त्म नहीं होगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने कहा है कि प्रस्तावित संविधान सभा चुनाव से पहले राजशाही को ख़त्म नहीं किया जाएगा. गिरिजा प्रसाद कोइराला ने कहा है कि जून में होने वाले चुनाव में ही राजशाही के बारे में फ़ैसला होगा. हालांकि उन्होंने बिराटनगर में पत्रकारों से बातचीत में ये भी कहा कि राजा ज्ञानेंद्र और राजकुमार पारस की छवि काफ़ी खराब है और बेहतर होगा कि वे स्वंय ताज छोड़ दें. राजा की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है. माना जाता है कि गिरिजा प्रसाद कोइराला राजशाही को पूरी तरह ख़त्म करने के बजाय, उसकी प्रतिकात्मक भूमिका रखने के पक्ष में है. लेकिन राजशाही को पूरी तरह ख़त्म करने की माँग लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले महीने राजा ज्ञानेंद्र ने लोकतंत्र दिवस पर अपने भाषण में दो साल पहले सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के अपने क़दम को सही ठहराया था. उसके बाद तो उनके खिलाफ़ दबाव और बढ़ गया है. माओवादी माँग करते आए हैं कि नेपाल को गणराज्य घोषित कर दिया जाए. माओवादियों ने ये भी आरोप लगाया है कि राजा ज्ञानेंद्र चुनावों को रूकवाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे माओवादियों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि वे सरकार में माओवादियों को तभी शामिल करेंगे जब वे आश्वस्त हो जाएँगे कि माओवादियों ने संयुक्त राष्ट्र को हथियार सौंप दिए हैं. माओवादियों की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि संयुक्त राष्ट्र के सामने जितनी हथियार पंजीकृत करवाए गए थे, उतनी संख्या में हथियार सौंपे नहीं गए हैं. माओवादियों के साथ हुए समझौते के तहत हथियार प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र पर है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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