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कावेरी मामले पर मिली जुली प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कावेरी नदी के पानी के बँटवारे पर कावेरी प्राधिकरण के फ़ैसले पर जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है वहीं कर्नाटक सरकार ने समीक्षा याचिका दायर करने का फ़ैसला किया है. कावेरी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जारी विवाद में फ़ैसला सुनाते हुए कावेरी प्राधिकरण ने कहा कि दोनों राज्यों को उम्मीद से कम पानी मिलेगा. कर्नाटक को 270 और तमिलनाडु को 419 टीएमसी (थाउजेंट मिलियन क्यूबिक फ़ीट) पानी दिए जाने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने केरल को 30 और पांडिचेरी को 9 टीएमसी पानी छोड़ने की व्यवस्था दी है. फ़ैसले के बाद तमिलनाडु में सत्तारुढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसकी सहयोगी कांग्रेस एवं सीपीआई ने इसका स्वागत किया जबकि एक अन्य सहयोगी दल पीएमके ने नाराज़गी जताई है. एमडीएमके प्रमुख वाइको ने इस फ़ैसले को राज्य के किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया. कर्नाटक सरकार भी प्राधिकरण के फ़ैसले से खुश नहीं दिखी और राज्य के उप मुख्यमंत्री येदीयुरप्पा ने कहा कि वो समीक्षा याचिका दायर करेंगे. हालांकि मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया सधी थी. उन्होंने कहा कि वो इस बारे में सभी दलों के साथ बैठक करने के बाद ही टिप्पणी करेंगे. राज्य के जल संसाधन मंत्री के एस इश्वरा ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह फ़ैसला कर्नाटक के लिए अन्यायपूर्ण है. फ़ैसले को देखते हुए बंगलौर समेत राज्य के कई अन्य इलाक़ों में पुलिस को अलर्ट पर रखा गया था. कई स्कूल कॉलेज बंद थे और सिनेमाहॉल भी दोपहर में बंद कर दिए गए थे. उधर कावेरी डेल्टा में खेती करने वाले किसानों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है औऱ कहा है कि प्राधिकरण ने सभी राज्यों के किसानों के हितों को ध्यान में रखा है. कर्नाटक ने 465 टीएमसी और तमिलनाडु ने 562 टीएमसी पानी की माँग की थी. हालांकि अभी कर्नाटक सालाना तमिलनाडु के लिए 192 टीएमसी पानी छोड़ता है. वैसे कावेरी नदी के पानी के बँटवारा चार राज्यों, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के बीच होना है. लेकिन विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच है. विवाद कावेरी के पानी के बँटवारे को लेकर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए दो जून 1990 को एक ट्रिब्यूनल या न्यायाधिकरण का गठन किया गया था.
इस ट्रिब्यूनल ने 25 जून 1991 को अपना अंतरिम फ़ैसला सुनाया था, जिसके तहत कर्नाटक को तमिलनाडु का हर साल 205 टीएमसी पानी देना था. लेकिन इससे विवाद ख़त्म नहीं हुआ और मामला अदालतों और ट्रिब्यूनल के बीच झूलता रहा. तमिलनाडु कावेरी से हर साल 562 टीएमसी पानी चाहता है जबकि कर्नाटक का कहना है कि तमिलनाडु सिर्फ़ 175 टीएमसी पानी का हक़दार है. उल्लेखनीय है कि कावेरी ट्रिब्यूनल ने लगातार की गई सुनवाई के बाद पिछले साल जुलाई में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों की पानी की ज़रुरत, फसल चक्र और पानी के बँटवारे को लागू करने के बारे में विस्तृत सुनवाई की थी. तमिलनाडु ने ट्रिब्यूनल से अपील की है कि वह पानी के बँटवारे पर निगरानी के लिए एक प्राधिकरण का गठन कर दे, जो कर्नाटक के सभी बाँधों से समय पर तमिलनाडु को पानी दिलवा सके. न्यायमूर्ति एनपी सिंह की अध्यक्षता वाले इस ट्रिब्यूनल में एनएस राव और सुधीर नारायण हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बंगलोर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त04 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस कावेरी मुद्दे पर बंगलौर में हड़ताल12 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना कावेरी विवाद आख़िर है क्या?04 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना तमिलनाडु में जनजीवन ठप09 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना पानी देना जारी रखें: सुप्रीम कोर्ट01 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना कावेरी विवाद का फ़िल्मी रंग04 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना पानी नहीं छोड़ेंगे: कर्नाटक05 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना तमिलनाडु को पानी दो: कोर्ट | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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