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कावेरी मामले में उम्मीदों पर पानी फिरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच 16 साल से चल रहे विवाद पर कावेरी ट्रिब्यूनल ने फ़ैसला सुना दिया है. दोनों राज्यों को उम्मीद से कम पानी मिलेगा. कर्नाटक को 270 और तमिलनाडु को 419 टीएमसी (थाउजेंट मिलियन क्यूबिक फ़ीट) पानी दिए जाने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने केरल को 30 और पांडिचेरी को 9 टीएमसी पानी छोड़ने की व्यवस्था दी है. कर्नाटक ने 465 टीएमसी और तमिलनाडु ने 562 टीएमसी पानी की माँग की थी. हालांकि अभी कर्नाटक सालाना तमिलनाडु के लिए 192 टीएमसी पानी छोड़ता है. वैसे कावेरी नदी के पानी के बँटवारा चार राज्यों, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के बीच होना है. लेकिन विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच है. इस विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक खींचतान, कई बार लोगों की नाराज़गी और तोड़फोड़ तक पहुँच चुकी है. इसे ध्यान में रखते हुए कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. विवाद कावेरी के पानी के बँटवारे को लेकर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए दो जून 1990 को एक ट्रिब्यूनल या न्यायाधिकरण का गठन किया गया था.
इस ट्रिब्यूनल ने 25 जून 1991 को अपना अंतरिम फ़ैसला सुनाया था, जिसके तहत कर्नाटक को तमिलनाडु का हर साल 205 टीएमसी पानी देना था. लेकिन इससे विवाद ख़त्म नहीं हुआ और मामला अदालतों और ट्रिब्यूनल के बीच झूलता रहा. तमिलनाडु कावेरी से हर साल 562 टीएमसी पानी चाहता है जबकि कर्नाटक का कहना है कि तमिलनाडु सिर्फ़ 175 टीएमसी पानी का हक़दार है. उल्लेखनीय है कि कावेरी ट्रिब्यूनल ने लगातार की गई सुनवाई के बाद पिछले साल जुलाई में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों की पानी की ज़रुरत, फसल चक्र और पानी के बँटवारे को लागू करने के बारे में विस्तृत सुनवाई की थी. तमिलनाडु ने ट्रिब्यूनल से अपील की है कि वह पानी के बँटवारे पर निगरानी के लिए एक प्राधिकरण का गठन कर दे, जो कर्नाटक के सभी बाँधों से समय पर तमिलनाडु को पानी दिलवा सके. न्यायमूर्ति एनपी सिंह की अध्यक्षता वाले इस ट्रिब्यूनल में एनएस राव और सुधीर नारायण हैं. सुरक्षा इंतज़ाम कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल के निर्णय पर किसी भी संभावित गड़बड़ी को ध्यान में रखते हुए बंगलौर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार बंगलोर में 16 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. 1991 में इस प्राधिकरण के एक अंतरिम निर्णय के बाद बंगलोर में तमिल अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 18 से भी अधिक लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे. बंगलौर के पुलिस आयुक्त अच्युत राव ने बीबीसी को बताया कि 1991 के दंगों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं. उन्होंने कहा कि हाल में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भड़के सांप्रदायिक दंगों से बंगलौर अभी उबरा ही है और पुलिस कोई मौक़ा नहीं देना चाहती. राव ने बताया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई एक सर्वदलीय बैठक में निर्णय का कर्नाटक के खिलाफ जाने की स्थिति में भी शांति बनाए रखने का आह्वान किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें बंगलोर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त04 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस कावेरी मुद्दे पर बंगलौर में हड़ताल12 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना कावेरी विवाद आख़िर है क्या?04 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना तमिलनाडु में जनजीवन ठप09 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना पानी देना जारी रखें: सुप्रीम कोर्ट01 नवंबर, 2002 | पहला पन्ना कावेरी विवाद का फ़िल्मी रंग04 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना पानी नहीं छोड़ेंगे: कर्नाटक05 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना तमिलनाडु को पानी दो: कोर्ट | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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