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शुक्रवार, 27 अक्तूबर, 2006 को 20:12 GMT तक के समाचार
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लोकप्रिय हो रहा है यौनकर्मियों का बैंक
ऊषा बैंक
मात्र 13 सदस्यों के सहयोग से बैंक की बुनियाद डाली गई थी
यौनकर्मी रह चुकी एक महिला के शुरू किए गए बैंक ने इतनी सफलता हासिल की है कि पश्चिम बंगाल में अब इसकी 12 अन्य शाखाएँ खोलने की तैयारी हो रही है.

यह बैंक कोलकाता में यौनकर्मियों की मदद के लिए शुरू किया गया था.

"ऊषा बहूद्देशीय सहयोग समिति" की स्थापना एक पूर्व यौनकर्मी रेखा चटर्जी ने 12 वर्ष पहले की थी. इसका मक़सद यौनकर्मियों को अन्य बैंकों में खाता खोलने में होने वाली परेशानियों से निजात दिलाना था.

इस बैंक की शुरुआत मात्र 13 व्यक्तियोँ से की गई थी लेकिन अब यह संख्या इतनी हो गई है कि इस बैंक में कंप्यूटराइज़ेशन' यानि खातों को कंप्यूटर पर चढ़ाने का काम हो रहा है.

रेखा चटर्जी ने बीबीसी को बताया, "हम इस बैंक के सदस्यों की संख्या बढ़ा कर 20 हज़ार करना चाहते हैं. हम लोगों का विश्वास हासिल करने में काफ़ी हद तक कामयाब रहे हैं."

रेखा बचपन में अपने माँ-बाप की प्रताड़ना से तंग आकर कोलकाता के 'रेडलाइट' इलाक़े में पहुँच गई थीं. आठ साल के बाद उन्होंने जब बाहर की दुनिया में क़दम रखा तो पाया कि उन जैसे लोगों के पैसे को सहेजने में ईमानदारी नहीं रखी जाती.

रेखा ने कहा, "सरकारी अधिकारी से लेकर साहूकार, सभी हम लोगों का शोषण करते हैं. लेकिन ऊषा की स्थापना के बाद हमारे जीवन में काफ़ी बदलाव आया है."

यौनकर्मियों के लिए काफ़ी मददगार साबित हुआ है ऊषा बैंक

रेखा ने कहा, "बैंक की कामयाबी के बाद लोगों के दिलों में हमारे प्रति नफ़रत की भावना ख़त्म हुई है. अब मैं सरकारी कार्यालयों में जाती हूँ तो लोग मुझे देख कर खड़े हो जाते हैं और मुझे बैठने को कहते हैं."

रेखा बैंक के ज़रिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ शुरू करना चाहती हैं. बैंक के अध्यक्ष पद से अवकाश प्राप्त करने से पहले वे इसकी शाखाएँ पूरे राज्य में खोलना चाहती हैं.

यह बैंक महिलाओं को घर बनाने के लिए भी क़र्ज़ देता है. रेखा का कहना है, "हम महिलाओँ को यह बताना चाहते हैं कि इस बैंक की सेवाओं के इस्तेमाल से उनका भविष्य सुरक्षित बन सकता है."

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