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भिखारी प्रकरण की जाँच हो: आईएमए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आईएमए यानि भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ने उस घटना की जाँच की माँग की है जिसमें कथित तौर पर एक टेलीविज़न चैनल पर तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को पैसे के बदले कुछ भिखारियों की टाँग काटने की पेशकश करते हुए दिखाया गया है. दिल्ली में बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि गुप्त रुप से फ़िल्माई गई इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि एक डॉक्टर करीब दस हज़ार रुपए के बदले में ऑपरेश्न करने को तैयार है. इस फ़िल्म के मुताबिक सरकारी अस्पताल में काम करने वाला एक डॉक्टर एक भिखारी की जाँच करता है और फिर उसकी टाँग काटने की पेशकश करता है. इस रिकॉर्डिंग के अनुसार ‘डॉक्टर भिखारी से पूछता है कि वो टाँग कहाँ के कटवाना चाहता है जिस पर भिखारी कहता है कि वो कहीं से भी काट सकते हैं.’ दो अन्य डॉक्टरों पर भी इस तरह का कथित ऑपरेश्न करने की पेशकश करने का आरोप है. भारतीय मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव मलिक ने घटना की जाँच की माँग की है. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए. लेकिन अगर ये सच है तो भारतीय चिकित्सिय इतिहास में ये अब तक का सबसे चौंकाने वाला तथ्य है और इसकी निंदा होनी चाहिए." इस रिपोर्ट के प्रसारण के बाद दिल्ली में नाराज़ लोगों की भीड़ मामले से जुड़े एक डॉक्टर के घर के बाहर इकट्ठा हो गई. इस तरह की अफ़वाहें लंबे समय से आती रही हैं कि कई आपराधिक गुट भिखारियों की टाँगे कटवाने के लिए पैसे देते हैं क्योंकि ऐसे में भिखारियों को ज़्यादा हमदर्दी मिलती है और वो ज़्यादा पैसे कमा पाते हैं. पुलिस ने कहा है कि उन्होंने इस रिकॉर्डिंग की कॉपियाँ माँगी है और वो सभी आरोपों की जाँच करेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें भिखारियों को काम देंगे मुलायम22 जून, 2005 | भारत और पड़ोस पेट की मार ने सिखाई कई भाषाएँ04 मई, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली में भीख देने पर जुर्माना06 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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