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उड़ीसा में नक्सली संगठनों पर प्रतिबंध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वी भारतीय राज्य उड़ीसा ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) समेत आठ नक्सलवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. राज्य सरकार ने शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फ़ैसला किया. इन संगठनों को राज्य में अतिवादी वामपंथी विचारधारा फैलाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है. प्रतिबंध लगाने के साथ ही उड़ीसा सरकार ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख़्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलवादियों के लिए विशेष पैकेज की भी घोषणा की है. उड़ीसा के मुख्य सचिव सुभाष पणि ने पत्रकारों को बताया कि नक्सली संगठन राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर ख़तरा बने हुए हैं, इसीलिए इन पर प्रतिबंधित लगाया गया है. प्रतिबंधित संगठनों के नाम हैं - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी), दमन प्रतिरोध मंच, क्रांतिकारी लोकतांत्रिक मोर्चा, चासी मुलिया संघ, कुई लबांग संघ, जन नाट्य मंडली, क्रंतिकारी किसान समिति और बाल संगम. ख़तरा पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों में नक्सलवादी हमले तेज़ हुए हैं. इसी महीने के शुरु में झारखंड में माओवादियों ने बारूदी सुरंग का विस्फ़ोट कर 12 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी. पिछले हफ़्ते इसी तरह के हमले में उड़ीसा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मारे गए थे. नक्सलवादी समस्या से जूझ रहे अन्य राज्य पहले ही ऐसे संगठनों को प्रतिबंधित कर चुके हैं लेकिन उड़ीसा में इन पर प्रतिबंध लागू नहीं था. प्रेक्षकों के अनुसार राज्य सरकार के ताज़ा फ़ैसले से सिर्फ़ सार्वजनिक तौर पर कार्यक्रम चलाने वाले संगठनों पर ही असर पड़ेगा और माओवादी जैसे भूमिगत संगठन इससे प्रभावित नहीं होंगे पैकेज मुख्य सचिव पणि ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलवादियों को समाज की मुख़्य धारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार दस हज़ार रुपए नकद प्रदान करेगी. हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वालों को 20 हज़ार रुपए नकद दिए जाएंगे. साथ ही उन्हें भूखंड दिया जाएगा और घर बनाने के लिए 25 हज़ार रुपए तक का कर्ज़ दिया जाएगा. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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