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'स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है...' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सेना प्रमुख पर हुए आत्मघाती हमले की श्रीलंका मॉनिटरिंग मिशन यानि वहाँ संघर्षविराम पर निगरानी रखने वाले दल ने कड़ी निंदा की है. अपने बयान में इस अंतरराष्ट्रीय दल ने कहा है कि ये हमला श्रीलंका की सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच हुए संघर्षविराम के समझौते के लिए एक और गंभीर धक्का है. ये भी कहा गया है कि इसका दोनो पक्षों के रिश्ते पर अत्यंत नकारात्मक असर हो सकता है और भविष्य में बातचीत की संभावना पर भी असर पड़ सकता है. फ़िलहाल इस दल ने इस हमले और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, इन विषयों पर तत्काल कोई भी नतीजे पर पहुँचने से परहेज़ किया है. लेकिन ये भी कहा गया है कि वह श्रीलंका की सरकार के साथ इस मामले की जाँच में सहयोग देने के लिए तैयार है. ज़ोर देकर इस दल ने ये कहा है कि पिछले कुछ हफ़्तों में श्रीलंका की सेना पर कई हमले हुए हैं लेकिन उन्होंने सब्र दिखाया है और कोई बड़ी जवाबी कार्रवाई नहीं की है. श्रीलंका की सरकार से इस दल ने अब भी अनुरोध किया है कि वह कोई बड़ी जवाबी कार्रवाई न करे. दल का कहना है कि युद्ध और हिंसा से तबाही ही होगी और ये श्रीलंका के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है. ये भी कहा गया है कि ज़रूरत ये है कि दोनो पक्षों के बीच बातचीत हर स्तर पर शुरु हो नहीं तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें मध्यस्थ जाएँगे तमिल विद्रोहियों के पास10 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस बारूदी सुरंग धमाके में छह की मौत10 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई पर जबरन वसूली का आरोप15 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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