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गुरुवार, 26 जनवरी, 2006 को 11:57 GMT तक के समाचार
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भुट्टो-ज़रदारी को 'रैड नोटिस'
बेनज़ीर भुट्टो
भुट्टो 1990 के दौर में पाकिस्तान की प्रधानमंत्री थीं
अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्था इंटरपोल ने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति आसिफ़ अली ज़रदारी की गिरफ़्तारी के रैड नोटिस' जारी किए हैं.

बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति आसिफ़ अली ज़रदारी पर पाकिस्तान में 1990 के दौर में भ्रष्टाचार करने के आरोप हैं.

ग़ौरतलब है कि उस समय बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री थीं. इस समय भुट्टो यूरोप में स्वनिर्वासित जीवन व्यतीत कर रही हैं.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि यह पहला मौक़ा है कि पाकिस्तान के कहने पर इंटरपोल ने इस तरह का बड़ा क़दम उठाया है.

अलबत्ता इंटरपोल ने कहा है कि भुट्टो और ज़रदारी को जो लाल नोटिस जारी किए गए हैं उन्हें अंतरराष्ट्रीय गिरफ़्तारी वारंट की बराबरी हासिल नहीं है.

इंटरपोल के एक बयान में कहा गया है कि इस संस्था के 184 सदस्यों पर निर्भर है कि वे रैड नोटिस पर अमल करना चाहते हैं या नहीं.

इस मामले में कोई भी फ़ैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान और उस विशिष्ठ देश के बीच प्रत्यर्पण संधि है या नहीं जिस देश में भुट्टो या ज़रदारी रह रहे हों.

इस वक़्त समझा जाता है कि ज़रदारी अमरीका के दौरे पर हैं जबकि भुट्टो के स्थान के बारे में कुछ जानकारी नहीं है.

वह लंदन और दुबई में अपना ज़्यादा समय गुज़ारती हैं.

दर्जनों मामले

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इंटरपोल के नोटिस पाकिस्तान के एक न्यायालय के इस फ़ैसले के बाद जारी किए गए हैं कि बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति न्याय से भाग रहे हैं.

आसिफ़ अली ज़रदारी

वे दोनों अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मुक़दमे में अदालत में पेश नहीं हुए हैं.

भुट्टो पर भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले चल रहे हैं. नवंबर 2005 में उन्हें एक मामले में बरी कर दिया गया था. उस मामले में आरोप था कि उन्होंने पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में अपनी पार्टी के समर्थकों को नौकरियाँ दिलाईं.

लेकिन भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर मामला स्विटज़रलैंड में चल रहा है लेकिन
भुट्टो और ज़रदारी दोनों ही स्विस कंपनी से रिश्वत लेने के आरोपों का खंडन करते हैं.

आसिफ़ अली ज़रदारी को आठ साल की जेल के बाद नवंबर 2004 में रिहा किया गया था. उन पर भ्रष्टाचार से लेकर हत्या तक के मामले रहे हैं.

सितंबर 2005 में अदालत ने आदेश दिया था कि वह अपने मुक़दमों में अदालत में पेश होने में नाकाम रहे हैं इसलिए उनकी गिरफ़्तारी के आदेश जारी किए गए थे.

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