|
पाकिस्तानी सेना में पहले सिख की भर्ती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार सिख समुदाय के किसी व्यक्ति को सैन्य अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है. सिख समुदाय के हरचरन सिंह, सेना में भर्ती होने के लिए ज़रूरी आईएसएसबी यानी इंटर सर्विसिस सिलेक्शन बोर्ड की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं. 19 वर्षीय हरचरन का संबंध पाकिस्तान के ननकाना साहिब इलाक़े से है. डॉन अख़बार के मुताबिक़ इस उपलब्धि पर हरचरन सिंह ने कहा, सिख समुदाय सेना में चुने जाने की ख़बर को लेकर हरचरन के परिवार वाले भी फूले नहीं समा रहे. बीबीसी को दिए गए साक्षात्कार में हरचरन सिंह के छोटे भाई सुरेंद्र सिंह ने कहा, “हम लोगों को कितनी खुशी हो रही है हम बयां नहीं कर सकते.” सुरेंद्र ने बताया कि हरचरन बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे थे. जब ये पूछा गया कि हरचरन सेना में भर्ती क्यों होना चाहते थे तो सुरेंद्र ने बताया, “हरचरन को बचपन से ही बंदूकों का शौक था.” सुरेंद्र ने कहा कि उनके परिवार की माली हालत भी अच्छी नहीं है. हरचरन के भाई ने कहा कि सिख समुदाय के लिए नौकरियों के अवसर बेहद कम हैं. पर सुरेंद्र ने उम्मीद जताई कि हरचरन के सेना में चुने जाने से सिख समुदाय के दूसरे युवकों के लिए अब दरवाज़ा खुल जाएगा. पीटीआई के मुताबिक़ हरचरन सिंह ने दूसरी बार आईएसएसबी की परीक्षा दी थी लेकिन सिख होने के चलते वे सेना के लिए चुने जाने को लेकर थोड़े आशंकित थे. डॉन अख़बार ने लिखा है कि इससे पहले ईसाई समुदाय के लोग तो पाकिस्तानी सेना में काम करते रहे हैं लेकिन हिंदू या सिख समुदाय के लोगों की कभी भी सेना में भर्ती नहीं हुई. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||