BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 09 नवंबर, 2005 को 12:57 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
पूर्व राष्ट्रपति नारायणन का निधन
नारायणन को श्रद्धांजलि अर्पित करते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
नारायणन पिछले कुछ समय से बीमार थे
भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन का बुधवार को दिल्ली में निधन हो गया. वे 85 वर्ष के थे.

उन्हें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रंद्धाजलि अर्पित की.

वे दिल्ली के एक सैनिक अस्पताल में भर्ती थे, उन्हें साँस लेने में पिछले कई दिनों से तकलीफ़ हो रही थी.

नारायणन सन् 1997 से 2002 तक भारत के राष्ट्रपति रहे. वो पहले राष्ट्रपति हैं जो दलित समुदाय से थे.

उनका कांग्रेस पार्टी से क़रीबी रिश्ता रहा. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें विदेश सेवा में नियुक्त किया था.

केआर नारायणन का जन्म 27 अक्टूबर 1920 को हुआ था. उन्होंने केरल के त्रावणकोर विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एमए किया था.

 मैं यह अपेक्षा नहीं रखता कि मेरे सपनों के भारत में केवल एक ही धर्म पनपे, अर्थात वह संपूर्ण हिंदू, ईसाई, या मुस्लिम देश बने
नारायणन,पूर्व राष्ट्रपति

उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनामिक्स में भी पढ़ाई की और वो पत्रकार भी रहे. उन्होंने हिंदू अख़बार के चेन्नई और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुंबई संस्करण में काम किया.

वे केएम मुंशी की पत्रिका सोशल वेल्फेयर के लंदन संवाददाता भी रहे और 1949 में भारतीय विदेश सेवा में आ गए.

उन्होंने रंगून, टोक्यो, लंदन और हनोई स्थित भारतीय दूतावासों में काम किया और वो थाइलैंड, तुर्की, चीन और अमरीका में राजदूत रहे.

विदेश सेवा से अवकाशग्रहण करने के बाद नारायणन दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति रहे.

नारायणन ने केरल के ओट्टपलम संसदीय क्षेत्र से 1984,1989 और 1991 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते.

इस दौरान वो केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी रहे. वो अगस्त, 1992 में उपराष्ट्रपति चुने गए और 1997 में राष्ट्रपति चुन लिए गए.

आदर्शों को लेकर चिंता

नारायणन
नारायणन ने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया था

राष्ट्रपति पद से अपने विदाई संदेश में केआर नारायणन ने इस बात पर खेद जताया था कि भारत की पुरानी पीढ़ी, नई पीढ़ी के लिए राष्ट्र-निर्माण का आदर्श स्थापित नहीं कर पाई है.

उन्होंने महात्मा गांधी का कथन दोहराया था जिसमें उन्होंने कहा था " मैं यह अपेक्षा नहीं रखता कि मेरे सपनों के भारत में केवल एक ही धर्म पनपे, अर्थात वह संपूर्ण हिंदू, ईसाई, या मुस्लिम देश बने. "

उन्होंने कहा था, "यह हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है कि हम सहिष्णुता की परंपरा को बनाए रखें क्योंकि वही हमारी संस्कृति और सभ्यता की आत्मा है."

गुजरात पर खेद

नारायणन के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में खासी हलचल मचा दी थी.

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा था कि गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान वे ख़ुद को शर्मिंदा और असहाय महसूस करते थे.

 मै अपने राष्ट्रपति-काल के दौरान बहुत असहाय महसूस करता था. प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिलकर अपनी समस्याएँ सुनाते थे लेकिन मैं कुछ ख़ास नहीं कर पाता था
केआर नारायणन

अपने राष्ट्रपति पद की अवधि पूरी होने के बाद पहले टीवी इंटरव्यू में नारायणन ने कहा था कि जब वे गुजरात में हुए दंगों के दौरान नागरिकों के लिए कुछ न कर पाए तो उन्होंने ख़ुद को बहुत असहाय महसूस किया था.

नारायणन का कहना था," मै अपने राष्ट्रपति-काल के दौरान बहुत असहाय महसूस करता था. प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिलकर अपनी समस्याएँ सुनाते थे लेकिन मैं कुछ ख़ास नहीं कर पाता था."

उन्होंने कहा कि गुजरात और उससे संबंधित सांप्रदायिक मुद्दे उन्हें बहुत दुखी करते थे क्योंकि इनका देश पर दूरगामी प्रभाव होता है.

नारायणन ने कहा था," ऐसी घटनाओं से देश के भविष्य और एकता पर असर पड़ता है और मुझे ऐसी घटनाओं ने बहुत प्रभावित किया.''

इससे जुड़ी ख़बरें
नारायणन ने सहिष्णुता याद दिलाई
25 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना
'शर्मिंदा और असहाय' नारायणन
14 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>