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सरहद पार से सैकड़ों क़ैदियों की रिहाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान की जेलों में बंद एक-दूसरे के क़ैदियों की आज बड़े पैमाने पर रिहाई हुई है. कुल 587 ऐसे क़ैदी आज अपने-अपने देश पहुँच सकेंगे जो पड़ोसी देश की जेलों में बरसों से बंद थे. इनमें से 435 भारतीय क़ैदी हैं जिन्हें पाकिस्तान ने रिहा किया है जबकि भारत की ओर से 152 क़ैदी छोड़े गए हैं. जो क़ैदी पाकिस्तान से भारत आ रहे हैं उनमें सबसे बड़ी संख्या मछुआरों की है जो ग़लती से जलसीमा के पार चले गए थे, इनकी संख्या है 371. इन 371 क़ैदियों को कराची की लांढी जेल से लाहौर लाया गया जहाँ से वे वाघा सीमा को पार करके भारत में दाख़िल हुए. इनके अलावा, 62 क़ैदी ऐसे हैं जिन्हें पाकिस्तानी प्रांत पंजाब की विभिन्न जेलों में रखा गया था. भारत जिन 152 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा कर रहा है उनमें से 51 पाकिस्तानी मछुआरे हैं जबकि 101 अन्य क़ैदी हैं जो पंजाब और जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद थे. पहले भी इससे पहले पाकिस्तान ने कुछ महीने पहले लगभग पाँच सौ मछुआरों को रिहा किया था, यह इस वर्ष होने वाली दूसरी रिहाई है. जिन लोगों को रिहा किया जा रहा है उनकी सज़ा पूरी हो चुकी है और उनकी राष्ट्रीयता की पहचान कर ली गई है. पिछले दिनों भारत और पाकिस्तान के गृह सचिवों की बातचीत में इस पर रिहाई पर अंतिम निर्णय लिए गए थे. भारत और पाकिस्तान की जेलों में ऐसे सैकड़ों कैदी बंद हैं जिनकी सज़ा पूरी हो चुकी है और वे रिहाई का इंतज़ार कर रहे हैं. इन क़ैदियों की रिहाई के बाद एक बार फिर सरबजीत सिंह के मामले पर चर्चा तेज़ होगी जिन्हें पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में रखा गया है और फाँसी की सज़ा सुनाई गई है. |
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