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गुरुवार, 08 सितंबर, 2005 को 17:06 GMT तक के समाचार
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मिल गई तस्वीर वाली युवती
शरबत गुल 17 साल पूर्व और बाद में
शरबत गुल 17 साल पूर्व और बाद में
बीस साल पहले एक अफ़ग़ान युवती ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था, जब उसकी तस्वीर 'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' पत्रिका के मुखपृष्ठ पर छपी थी.

सिर पर गहरा लाल दुपट्टा और आँखों में झलकती मासूमियत. जिस किसी ने भी तस्वीर देखी ठगा-सा रह गया.

'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' पत्रिका ने मार्च, 2002 में आँखों की पुतलियों के ज़रिए पहचान की अत्याधुनिक तकनीक के सहारे शरबत गुल नामक उस युवती का पता लगाने का दावा किया.

और जब शरबत को 17 साल बाद फिर से मिली तो वह अफ़ग़ानिस्तान के एक सुदूरवर्ती इलाक़े में रह रही थीं. शादीशुदा, और अपने बच्चों के साथ.

दोबारा मुखपृष्ठ पर

'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' ने एक बार फिर उसे अपने मुखपृष्ठ पर स्थान देने का फ़ैसला किया.

सत्रह साल बाद फिर से मुखपृष्ठ पर

शरबत की प्रसिद्ध हो चुकी तस्वीर 1984 में खींची गई थी. तब वह मात्र 13 साल की थी.

पश्तून मूल की शरबत के पिता सोवियत सेनाओं के साथ संघर्ष में मारे गए थे.

वह पाकिस्तान के नासिर बाग में एक शरणार्थी शिविर में अपने परिवार के बाकी सदस्यों के साथ रह रही थी. वहीं 'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' के छायाकार स्टीव मैककरी की नज़र उस पर पड़ी.

प्रसिद्धि

उस तस्वीर को दुनिया भर में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और किताबों में स्थान मिला.

ख़ुद छायाकार के अनुसार तस्वीर से शरणार्थियों की पीड़ा को स्वर मिलता है.

तस्वीर के प्रकाशित होते ही मैककरी को शरबत के बारे में दुनिया भर से संदेश मिलने लगे. लोगों की जिज्ञासा यह थी कि आख़िर कहाँ है शरबत.

यह सवाल मैककरी का भी लगातार पीछा करता रहा. तभी तो शरबत से दोबारा मुलाक़ात की उम्मीदों के साथ उन्होंने 10 बार इलाक़े का दौरा किया.

अंतत: 'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' के एक दल के सहयोग से उन्होंने शरबत को पाकिस्तानी सीमा के पास उसके पुश्तैनी अफ़ग़ान गाँव में ढूंढ निकाला.

कठिन जीवन

वह प्रसिद्ध तस्वीर खींचे जाने के कुछ दिन बाद शरबत की शादी हो गई. उसके बाद उसने चार लड़कियों को जन्म दिया जिनमें से एक की शैशवास्था में ही मौत हो गई.

शरबत ने 1985 में बुर्क़ा पहनना शुरू किया.

उससे दूसरी मुलाक़ात के बाद मैककरी ने कहा, "उसकी ज़िंदगी कठिन है."

दिलचस्प बात ये है कि जिस तस्वीर ने शरबत को दुनिया की जिज्ञासा का केंद्र बना कर रखा, वह उसके नज़रों से नहीं गुजरी थी.

जब 'नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक' के दल ने उसे तस्वीर दिखाई तो शरबत ने उस पसंद भी नहीं किया. दरअसल उसे स्कॉर्फ़ में सुराख पसंद नहीं आए.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि शरबत ही मशहूर तस्वीर वाली लड़की है, नेशनल ज्यॉग्रॉफ़िक के दल ने अमरीका की संघीय जाँच एजेंसी द्वारा प्रयुक्त आँखों की पुतलियों के मिलान की तकनीक का प्रयोग किया.

दरअसल दो व्यक्तियों की पुतलियाँ हूबहू एक जैसी नहीं हो सकती.

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