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मुजाहिदीन से बना पर्वतारोही गाइड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की दुर्गम पहाड़ियों में कई युद्ध लड़े चुके कुछ मुजाहिदीन लड़ाके इन दिनों ख़ास प्रशिक्षण ले रहें हैं. ये लड़ाके पर्वतारोही गाइड बनने के लिए प्रशिक्षण पा रहे हैं. राजधानी काबुल में इटली की एक संस्था विशेष कार्यक्रम के तहत स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर रही है. जिन 22 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है उनमें नौ पूर्व मुजाहिदीन लड़ाके हैं. इन 9 लोगों को संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले एक कार्यक्रम के तहत चुना गया है जो लड़ाकू गुटों को भंग करने के लिए ज़िम्मेदार है. इस योजना को अगा ख़ान फ़ाउंडेशन और अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमरीकी एजेंसी का समर्थन भी हासिल है. पर्यटन इस विशेष कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे लोगों को ग्लेशियर पार करने और पहाड़ों पर चढ़ने समेत कई पहलुओं के बारे में सिखाया गया है. कमांडर रहीम ख़ान पूर्व मुजाहिदीन लड़ाके हैं और इस साल हथियार डाल चुके हैं. उनका कहना है, "रूसी सेना के ख़िलाफ़ लड़ते समय मुझे पहाड़ों का काफ़ी अनुभव हुआ. अब मैं इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण मक़सद के लिए करूंगा."
क़रीब तीन दशक पहले अफ़ग़ानिस्तान पर्वतारोहण का मुख्य केंद्र बनता जा रहा था. लेकिन युद्ध ने सब कुछ बंद कर दिया. सदियों से अफ़ग़ानिस्तान के हिंदुकुश पहाड़ ने बाहरी हमलावरों से उसकी सुरक्षा की है. अब इन्हीं पहाड़ियों के ज़रिए देश में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. दिक्कत पर्वतों की जानकारी होने के बावजूद पूर्व मुजाहिदीन लड़ाकों के लिए बदलाव की ये प्रकिया आसान नहीं है. ये लोग अंग्रेज़ी भाषा नहीं समझते लेकिन विदेशी सैलानियों से बात करने के लिए अंग्रेज़ी जानना ज़रूरी है. लेकिन इटली की संस्था के प्रमुख प्रोफ़ेसर कार्लो कहते हैं कि ये पहला क़दम है. उन्हें उम्मीद है कि उनके प्रशिक्षु काम करते करते धीरे धीरे सब गुर सीख लेंगे. |
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