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सेंटूर मामला: सीपीएम ने उठाए सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने सेंटूर बिक्री के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. सीपीएम नेता दीपांकर मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा सीबीआई को इस मामले की जाँच कर वास्तविक दोषियों को सामने लाना चाहिए. उन्होंने इस मामले की सीबीआई से जाँच कराने के सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया. सीपीएम नेता ने कहा कि एएल बत्रा ने एयरपोर्ट सेंटूर होटल 83 करोड़ रुपए में ख़रीदा और चार महीने बाद 115 करोड़ रुपए में बेच दिया और 32 करोड़ रुपए का मुनाफ़ा कमा लिया. उनका कहना था कि यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि भारतीय होटल निगम और बत्रा के बीच हुए समझौते में कमी थी. दीपांकर मुखर्जी का कहना था कि बत्रा की कंपनी और रंजन भट्टाचार्य की कंपनी में एक निदेशक साझा है. उन्होंने माँग की सीबीआई को रंजन भट्टाचार्य से पूछना चाहिए कि क्या बत्रा और भारतीय होटल निगम के बीच बिक्री समझौते के पहले उनके एक सहयोगी ने होटल निगम के एक अधिकारी को फ़ोन किया था और समझौते के विषय में जानकारी चाही थी. सीएजी की रिपोर्ट उल्लेखनीय है कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने मुंबई के सेंटूर होटल के बेचने को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) सरकार की विनिवेश नीति की कड़ी आलोचना की थी. महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विनिवेश मंत्रालय ने बिना किसी प्रतिस्पर्धी की तलाश के सेंटर होटल को बेचा था. साथ ही रिपोर्ट में पूरी प्रक्रिया और होटल की कीमत के आकलन की भी आलोचना की गई थी. इसमें कहा गया है कि जुहू सेंटूर और एयरपोर्ट सेंटूर की बिक्री को केवल एक बोली के आधार पर अंतिम कर दिया गया. लेकिन अरुण शौरी ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और जुहू सेंटूर की बिक्री के मामले में खुली जाँच की चुनौती दी थी. तत्कालीन एनडीए सरकार ने पर्यटन विकास निगम के चार होटलों को बेचने का फ़ैसला किया था. ये सभी होटल घाटे में चल रहे थे और सरकार इनमें फँसी पूँजी को निकालना चाहती थी. |
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