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तिरंगे की पाबंदियाँ ढीली हुईं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आज़ादी हासिल करने के वर्षों के बाद आख़िरकार भारतीय लोग अब अपने राष्ट्रीय ध्वज के रंग अगर चाहें तो अपने कपड़ों पर भी चढ़ा सकेंगे यानी उसके रंग में रंग सकते हैं. यह आज़ादी मिली तो है लेकिन कुछ शर्तों के साथ यानी तिरंगे की छाप वाले कपड़े सिर्फ़ कमर से ऊपर ही पहने जा सकते हैं और टांगों में पहने जाने वाले कपड़ों पर तिरंगे की छाप बनाने की इजाज़त नहीं होगी. यानी तिरंगे की छाप वाली टोपी, क़मीज़ और टी शर्ट पहनी जा सकती हैं लेकिन तकियों के गिलाफ़ों, दस्तानों, रुमालों जैसी चीज़ों पर तिरंगा नहीं छापा जा सकेगा. भारत की संघीय सरकार ने इसके लिए 1971 के उस क़ानून में ज़रूरी बदलाव कर दिए हैं जिसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों का अपमान रोकने के लिए बनाया गया था. इस क़ानून में राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल और प्रदर्शन के नियम बड़ी बारीक़ी से तय किए गए हैं. सिर्फ़ सरकार के वरिष्ठ सदस्यों और राज्यों के संस्थानों को ही अपनी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की इजाज़त है. आम लोगों को गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गाँधी के जन्म दिन पर तिरंगा फहराने और उसके बैज पहनने की इजाज़त है. तिरंगे को फहराने और उसके प्रदर्शन पर लगी इन पाबंदियों के ख़िलाफ़ 1995 में उस वक़्त संघर्ष शुरू हुआ था जब उद्योगपति और मौजूदा कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदाल ने माँग की थी कि सभी भारतीयों और संस्थानों को सम्मान सहित राष्ट्रीय ध्वज फहराने की इजाज़त होनी चाहिए. अदालत ने 2001 में जिंदाल के पक्ष में फ़ैसला दिया था और उसी के बाद सरकार ने इस सप्ताह क़ानून में बदलाव किया. जिंदाल ने मीडिया से कहा, "यह एक महत्वपूर्ण शुरूआत है और सही समय पर और पाबंदियाँ भी हटा दी जाएंगी." दिल्ली के एक फ़ैशन डिज़ाइनर निखिल मेहरा ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए बीबीसी से कहा, "हम भारतीय लोग प्रकृति से बहुत देशभक्त होते हैं और आज़ादी के 57 साल बाद हमें अपनी देश भक्ति को व्यक्त करने का मौक़ा मिला है." |
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