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शनिवार, 30 अप्रैल, 2005 को 22:44 GMT तक के समाचार
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एक माँ को बेवजह मिली सज़ा
कमला ख़ातून
कमला ख़ातून आठ वर्ष जेल में बिता चुकी हैं
यह एक सच्ची कहानी है जिसमें कई दर्दनाक और त्रासदीपूर्ण मोड़ हैं.

पहले तो एक माँ पर अपने जवान बेटे की हत्या का आरोप लगा और अदालत ने इसके लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.

फिर जब वह आठ साल की सज़ा काट चुकी तो उसका बेटा जीवित निकला और उसने बयान दिया कि उसके पिता ने षडयंत्र करके उसकी माँ को फँसाया था.

और साथ में फँस गए थे उसके सौतेले पिता.

यह लोमहर्षक कहानी है बांग्लादेश की.

कमला ख़ातून पर आरोप था कि उन्होंने अपने पति मीज़ानुर रहमान के साथ मिलकर अपने 19 वर्षीय बेटे फ़ारुक़ की हत्या कर दी है.

पूर्व पति का आरोप

कमला ख़ातून की पहली शादी जलहसुद्दीन से हुई थी और फ़ारुक़ उसी शादी से पैदा हुआ बेटा था. बाद में कमला ने मीज़ानुर रहमान से शादी कर ली.

कमला के पूर्व पति जलहसुद्दीन ने आरोप लगाया था कि उसने अपने पति मीज़ानुर के साथ मिलकर फ़ारूक़ का अपहरण किया और फिर उसकी हत्या कर दी.

हालांकि फ़ारुक़ की लाश कभी नहीं मिली लेकिन अदालत ने दोनों को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी.

जेल में सज़ा काटते उनको आठ साल हो गए थे तभी एक दिन फ़ारुक़ सामने आया और बताया कि उसकी कभी हत्या ही नहीं हुई थी.

धमकी

फ़ारुक़ ने बताया कि दरअसल उनके पिता ने हत्या की कहानी बनाई और उसे छिपकर रहने को कहा.

फ़ारुक़ ने अदालत को बताया कि उसके पिता ने धमकाया था कि वह किसी के सामने राज़ न खोले.

स्थानीय अदालत ने जाँच के बाद पाया कि फ़ारूक़ कमला ख़ातून और जुलहसुद्दीन का ही बेटा है जिसकी हत्या के जुर्म में दो लोग आठ वर्ष से सज़ा काट रहे हैं.

इसके बाद ढाका हाईकोर्ट ने इन दोनों लोगों की रिहाई का आदेश दिया और साथ ही उनके ख़िलाफ़ चले मुक़दमे की जाँच भी शुरू करने का हुक्म दिया.

उत्तरी बांग्लादेश की शेरपुर जेल से रिहाई के बाद कमला ख़ातून ने माँग की कि उनके पहले पति पर मुक़दमा चलना चाहिए जिनके झूठ की वजह से उन्हें इतनी यातना सहनी पड़ी.

कमला ख़ातून और उनके बेटे फ़ारूक़ रिहाई के बाद बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठनों की निगरानी में रह रहे हैं.

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