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भूटान में नए संविधान का मसौदा तैयार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भूटान में एक नए संविधान का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें देश की राजशाही को दो-दलीय लोकतंत्र में बदले जाने की व्यवस्था है. भूटान नरेश जिग्मे सिंग्ये वांग्चुक ने कहा है कि संविधान का मसौदा देश के पाँच लाख तीस हज़ार नागरिकों में से प्रत्येक के पास भेजा जाएगा और उनकी राय माँगी जाएगी. प्रस्तावित संविधान में 34 धाराएँ हैं. इसमें राजपरिवार और बौद्ध धर्मगुरुओं की भूमिका और जनता के कर्तव्यों को नियमबद्ध किया गया है. भूटान के मुख्य न्यायाधीश सोनाम तोब्ग्ये ने बीबीसी को बताया कि इस साल के अंत में प्रस्तावित संविधान पर जनमत संग्रह कराया जाएगा. तोब्ग्ये ने कहा कि 49 वर्षीय नरेश ने सभी नागरिकों ने संविधान के मसौदे को पढ़ने और अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा है. नरेश वांग्चुक ने देश के एक मात्र अख़बार कुएन्सेल को बताया, "देश की संप्रभुता, स्थिरता और ख़ुशहाली को बाकी चीज़ों से ऊपर जगह मिलनी चाहिए. देश नरेश से ज़्यादा महत्वपूर्ण है." उल्लेखनीय है कि संविधान की रूपरेखा देश में लोकतंत्र स्थापित करने के चार वर्षों से चल रहे प्रयासों की कड़ी में सामने आई है. संविधान में जिन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की स्थापना की बात है उनमें राष्ट्रीय परिषद सर्वप्रमुख है. इस परिषद के लिए राष्ट्रीय संसद के लिए निर्वाचित सदस्यों में से चयन किया जाएगा. नया संविधान 1953 के उस अध्यादेश की जगह लेगा जो भूटान नरेश को एकछत्र शासन का अधिकार देता है. |
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