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गुरुवार, 17 मार्च, 2005 को 07:20 GMT तक के समाचार
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पाँच बेटियों की हत्या के बाद ख़ुदकुशी

लाशें
घर से पुलिस को कुल छह लाशें मिलीं
उत्तरांचल में पुलिस ने कहा है कि एक पिता ने अपनी पाँच बेटियों की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली है.

ये घटना राजधानी देहरादून में विधानसभा के नजदीक एक सरकारी कॉलोनी केदारपुरम की है.

सुरेंद्र वर्मा नाम का व्यक्ति यहाँ अपनी पाँच बेटियों के साथ रहता था. बुधवार को जब सारे दिन घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने जबरन दरवाजा खोलने की कोशिश की और इसकी सूचना पुलिस को दी.

देहरादून के पुलिस अधीक्षक पीवीके प्रसाद ने बताया, "हमें सबसे पहले खिड़की से एक बच्ची की लाश नज़र आई फिर जैसे-जैसे हम अंदर गए एक के बाद एक करके हमें छह लाशें मिलीं. सभी के मुँह से झाग निकले गुए थे और वहाँ सल्फास की शीशी भी पड़ी हुई थी.”

पुलिस ने सभी 6 लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और सुरेंद्र वर्मा के संबंधियों को सूचित कर दिया गया है.

 अपनी बेटियों को लेकर वो काफी चिंतित रहते थे और शादी के लिए दहेज नहीं जुटा सकने की बातें करते थे. इधर कुछ दिनों से बीमार भी थे और अनमने से रहने लगे थे
सुरेंद्र वर्मा के पड़ोसी

दिल दहला देने वाली इस घटना से पूरा शहर सकते में है. ये पाँचों लड़कियाँ 22, 19, 16, 12 और 9 साल की थीं और इनके पिता की उम्र लगभग 55 साल थी.

पुलिस के मुताबिक ऐसा लगता है कि इस व्यक्ति ने पहले अपनी लड़कियों को डराया-धमकाया और मार-पीटकर ज़हर खाने के लिए मजबूर किया होगा क्योंकि बच्चियों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए हैं.

मूल रूप से मेरठ का रहने वाला सुरेंद्र वर्मा नर्सरी में काम करता था. उसने दो शादियाँ की थीं. पहली पत्नी का काफी पहले देहांत हो चुका था और दूसरी पत्नी ने लगभग तीन साल पहले आत्महत्या कर ली थी.

हालाँकि घटनास्थल से उसका लिखा हुआ को ख़त वग़ैरह तो नहीं मिला है लेकिन शुरूआती रूप में ये समझा जा रहा है कि उसने बेटियों से छुटकारा पाने के लिए ये क़दम उठाया.

घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं होने के कारण वो अपनी बेटियों की शादी नहीं कर पा रहा था.

सुरेंद्र वर्मा के एक पड़ोसी ने कहा, "अपनी बेटियों को लेकर वो काफी चिंतित रहते थे और शादी के लिए दहेज नहीं जुटा सकने की बातें करते थे. इधर कुछ दिनों से बीमार भी थे और अनमने से रहने लगे थे.”

दहेज की समस्या और तंगहाली से परेशान होकर की गई इन हत्याओं ने लगभग 15 साल पहले कानपुर में हुई उस घटना की याद दिला दी है जिसमें चार बहनों ने एक साथ आत्महत्या कर ली थी जिससे कि उनके परिवार को दहेज के भार से मुक्ति मिल सके.

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