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अश्लील वेबसाइटों पर लगी पाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की सरकार ने राज्य में अश्लील वेबसाइटों के देखे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार के इस नए आदेश के मुताबिक इन वेबसाइटों को देखने के लिए दोषी पाए जाने वाले लोगों को दो लाख रूपए तक ज़ुर्माना और 10 साल के सश्रम कारावास का दंड दिया जाएगा. इस तरह की वेबसाइटों को देखने या दिखाने के लिए दोषी पाए जाने पर पहली बार में ही एक लाख रूपए का जुर्माना और पाँच साल की कैद हो सकती है. इस बाबत राज्य के सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्री वीरेंद्र सिंह ने कहा, "इस आदेश के प्रभावी होने के बाद राज्य भर में चल रहे तमाम साइबर केंद्रों में ऐसे सॉफ़्टवेयर लगाए जाएँगे जिनके बाद लोग ऐसी वेबसाइट नहीं देख सकेंगे." उन्होंने कहा, "अब तमाम साइबर केंद्रों को अपने यहाँ एक मास्टर कंप्यूटर लगाना होगा जिससे इस बात पर निगरानी रखी जा सके कि कौन व्यक्ति क्या देख रहा है." उपाय सरकार के इस फैसले से राज्य भर के सभी पुलिस प्रमुखों और जिलाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और उन्हें निर्देश दिया गया है कि वो अपने क्षेत्रों में चल रहे साइबर केंद्रों पर छापा मारकर इसकी जाँच करें.
ग़ौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार ने आदेश जारी किया था कि सभी साइबर केंद्रों में बनाए गए व्यक्तिगत केबिन ख़त्म कर दिए जाएँ. देश की एक बड़ी प्रौद्योगिकी संस्था, नेस्कॉम के एक अधिकारी मोहम्मद शहाबुद्दीन ने इस बाबत बीबीसी को बताया, "ऐसे सॉफ़्टवेयर बनाए जा चुके हैं जिनके इस्तेमाल से इस तरह की वेबसाइटों को रोका जा सकता है". उन्होंने बताया कि इस तरह के सॉफ़्टवेयर अमरीका जैसे देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं ताकि बच्चे टीवी या इंटरनेट पर कोई अश्लील सामग्री न देख सकें. वो बताते हैं, "भारत में भी सुरक्षा प्रणाली को और ज़्यादा बेहतर बनाने के लिए ऐसे सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल हो रहे हैं पर अश्लील वेबसाइटों के मामले में अभी इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है." विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में इस नए कानून के लागू होने से पुलिस और प्रशासन को और अधिक अधिकार मिल जाएँगे जिनका सहारा लेकर वो इंटरनेट के व्यवसाय से जुड़े लोगों का शोषण भी कर सकते हैं. ख़ुद शहाबुद्दीन मानते हैं कि सरकार को ऐसे कदम उठाने के बजाए लोगों को इंटरनेट के बेहतर प्रयोग के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए. |
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