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चेतावनी प्रणाली पर सहयोग का भरोसा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि हिंद महासागर में सूनामी चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के काम में यूनेस्को समेत सभी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग करेगा. भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को यह घोषणा की. दिल्ली में सूनामी चेतावनी पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए सिब्बल ने कहा कि भारत सवा अरब रुपये की लागत से ख़ुद की चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का फ़ैसला कर चुका है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार हिंद महासागर में चेतावनी प्रणाली लगाने की कोशिश में जुटी एजेंसियों से सहयोग करेगी. दो दिवसीय सम्मेलन में अमरीका, कनाडा, जापान, जर्मनी, रूस और यूनेस्को जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के 100 से ज़्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक समुदाय को तमाम संसाधन मुहैया कराएगी. उन्होंने कहा कि सरकार 2005 को आपता जागरुकता वर्ष घोषित करने पर विचार कर रही है. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में हिंद महासागर में उठी सूनामी लहरों से भारत में दस हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. |
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