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नियोगी के हत्यारे को उम्रक़ैद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जबलपुर हाईकोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मज़दूर नेता शंकर गुहा नियोगी के हत्यारे पल्टन मल्लाह को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड के अन्य अभियुक्तों सिम्पलेक्स इंडस्ट्रीज़ के मूलचंद शाह, नवीन शाह, चंद्रकांत शाह के अलावा ज्ञानप्रकाश मिश्र और अवधेश राय अभय को बरी करने के हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है. मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट ने पल्टन मल्लाह को रिहा करने का आदेश दिया था जिसके ख़िलाफ़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने यह फ़ैसला सुनाया था. शंकर गुहा नियोगी छत्तीसगढ़ में मज़दूरों के बीच काम करते थे और उन्होंने छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का गठन कर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था. 27 सितंबर 1991 की रात उनके घर पर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. वे उस समय सो रहे थे. उनकी हत्या का देश में बड़ा विरोध किया गया था. तत्कालीन मध्यप्रदेश की सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई के हवाले कर दिया था. न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति एआर लक्ष्मण की दो सदस्यीय खंडपीठ ने 14 सितंबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी. इस मामले में निचली अदालत ने 23 जून 1997 को पल्टन मल्लाह को मौत की सज़ा सुनाई थी और दूसरे अभियुक्तों को मृत्युदंड का फ़ैसला दिया था. सीबीआई का दावा था कि पल्टन मल्लाह भाड़े का हत्यारा था. उसने पल्टन मल्लाह सहित छह अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर किया था. निचली अदालत के फ़ैसले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पर्याप्त सुबूत नहीं है. |
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