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भारत-नेपाल के बीच नई प्रत्यर्पण संधि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और नेपाल ने अपराधियों और संदिग्ध 'आतंकवादियों' को एक दूसरे के देश से अपने देश में लाने के लिए नई प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए हैं. भारतीय गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि दोनो देशों के अधिकारियों की दो दिन की बातचीत के बाद संधि पर हस्ताक्षर किए गए. इस संधि पर संयुक्त बयान बाद में जारी किया जाएगा. भारतीय गृह सचिव धीरेंद्र सिंह और नेपाल के गृह सचिव चंडी प्रसाद श्रेष्ठ ने दिल्ली में दो दिन की बातचीत की है. बातचीत में 'आतंकवादी' गतिविधियों और आर्थिक आपराधों में शामिल भारतीय और नेपाली नागरिकों का प्रत्यर्पण किए जाने पर चर्चा हुई. नई संधि पचास साल पुरानी संधि की जगह लेगी और अधिकारी मान रहे हैं कि इससे नई चुनौतियों और नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में माओवादी हिंसा से निपटने में मदद मिलेगी. दोनो पक्षों में 1580 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पार करने वाले लोगों के लिए पहचान पत्र जारी करने के बारे में भी विचार विमर्श हुआ. अधिकारियों का मानना है कि यदि सीमा के दोनो ओर माओवादियों ने आपस में संपर्क साधा है तो इससे निपटने में भी नई प्रत्यर्पण संधि से मदद मिलेगी. |
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