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शांतिवार्ता से अलग हुए नक्सली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आँध्र प्रदेश में दो नक्सलवादी पार्टियों ने राज्य सरकार के साथ चल रही शांति वार्ता तोड़ देने का ऐलान किया है. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी– मार्क्सवादी-लेनिनवादी (जनशक्ति) ने कहा है कि शांति वार्ता से हटने का फ़ैसला पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ किया गया है. नक्सली नेताओं का कहना है कि संघर्ष विराम के बावजूद पुलिस उनके साथियों को मार रही है. इसके साथ ही पिछले तीस साल से ज़्यादा समय से चल रहे सशस्त्र संघर्ष के अंत की संभावनाओं पर सवालिया निशान लग गया है. बंद पुलिस कार्रवाई का विरोध करने के लिए नक्सलवादियों की ओर से आज आंध्र प्रदेश में बंद की अपील की गई थी. समाचार एजेंसी एएफ़पी की ख़बर के मुताबिक़ इस कारण कई जगहों पर बाज़ार और दफ़्तर बंद रहे. राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले काँग्रेस पार्टी ने नक्सलवादियों से बातचीत करने का आश्वासन दिया था. काँग्रेस की सरकार बनने के बाद पीपुल्स वॉर ग्रुप नाम के नक्सली संगठन पर से प्रतिबंध उठा लिया गया था. कुछ समय बाद पीपुल्स वॉर और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर का विलय हो गया और एक नई माओवादी पार्टी बनाई गई. विवाद उसके बाद सरकार और माओवादी पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ.
पर शांतिवार्ताओं के बावजूद नक्सली नेता और छापामार हथियार छोड़ने पर राज़ी नहीं हुए. राज्य सरकार ने कहा कि अगर नक्सली नेताओं को हथियार लिए घूमते देखा गया तो पुलिस क़ानूनी कार्रवाई करेगी. आंध्र प्रदेश के तेलंगाना इलाक़े में माओवादी आंदोलन काफ़ी मज़बूत है और प्रतिबंध हटने के बाद नक्सली वहाँ के गाँवों में खुलेआम हथियार लेकर आने जाने लगे. पिछले दो हफ़्तों से पुलिस और नक्सलवादियों के बीच तनाव और बढ़ गया था. इस बीच पुलिस ने अलग अलग घटनाओं में ग्यारह नक्सवादियों को मार डाला था. उधर नक्सलियों ने भी अपनी कार्रवाइयाँ बढ़ा दीं. |
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