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जवान ने सात साथियों को गोली मारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर के बारामूला ज़िले में सीआरपीएफ़ के एक कैम्प में एक जवान ने अपने सात साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी है. शनिवार को आधी रात के क़रीब हुई इस गोलीबारी में दो लोग घायल भी हुए हैं. बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन ने ख़बर दी है कि सीआरपीएफ़ के अधिकारियों का कहना है कि जब इस अपने साथियों पर गोलियाँ चलाईं तो इस गोलीबारी से घायल एक जवान ने जवाब में गोलियाँ दागीं जिससे उसकी भी मौत हो गई. इस जवान का नाम एस डेका बताया गया है. अब तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि उसने क्यों गोली चलाई. बीबीसी संवाददाता के अनुसार मारे गए लोगों में सीआरपीएफ़ का एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर और एक हेडकांस्टेबल है और शेष कांस्टेबल हैं. ख़बर है कि छह लोगों की मौत तो घटना स्थल पर ही हो गई लेकिन एक की मौत अस्पताल में हुई. ख़बर हैं कि दो घायलों का श्रीनगर के अस्पताल में इलाज किया जा रहा है. सीआरपीएफ़ के 152वीं बटालियन में घटी इस घटना के बारे में अधिकारी अभी इससे ज़्यादा विवरण नहीं दे रहे हैं. उनका कहना है कि वे रविवार को एक वक्तव्य जारी करेंगे. तनाव सुरक्षा बलों के किसी जवान द्वारा इस तरह अपने साथियों पर गोली चलाने की घटना पहली बार नहीं हो रही है. बीबीसी ने जब भारत के ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व प्रमुख अरुण भगत से इन घटनाओं का कारण जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसी घटनाएँ किसी न किसी दबाव के कारण होती है. उनका कहना है कि ये दबाव कई तरह का हो सकता है. वे मानते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों का अपने मातहतों को समुचित सम्मान न देना भी इसकी वजह हो सकती है. इससे पहले कुछ घटनाएँ जवानों को छुट्टी न मिल पाने के तनाव में भी हुई हैं लेकिन अरुण भगत का मानना है कि छुट्टियों को लेकर नियम सख़्त हैं और स्पष्ट रुप से कहा गया है कि सभी को बारी बारी छुट्टी मिलनी ही चाहिए ऐसे में इसकी वजह से कोई घटना नहीं होनी चाहिए. बीबीसी संवाददाता के अनुसार सेना की ओर से पहले भी इस तरह की घटनाओं की वजह जानने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति से जाँच करवाई गई थी लेकिन उसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई. |
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