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मनमोहन सिंह विस्थापित पंडितों से मिलेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जम्मू-कश्मीर की अपनी दो दिवसीय यात्रा के क्रम में आज जम्मू पहुँच रहे हैं. श्रीनगर में बुधवार को हुई घटना के बाद प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी कर दी गई है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के शरणार्थी शिविर में जाएँगे. उसके बाद वे परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री सुरक्षा बलों की संयुक्त कमान की बैठक में भी हिस्सा लेंगे. दिल्ली रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री एक संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह पहली बार जम्मू-कश्मीर के दौरे पर बुधवार को पहुँचे थे. बुधवार से ही जम्मू-कश्मीर में lतैनात सैनिकों की संख्या में कटौती भी शुरू हो गई है. इसे कश्मीर मसले के हल के प्रति मनमोहन सिंह सरकार की एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. हालाँकि श्रीनगर में प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा में फेरबदल वाला कोई भी प्रस्ताव उन्हें मंज़ूर नहीं. यह प्रस्ताव पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की उस अनौपचारिक पेशकश में शामिल था, जो उन्होंने पिछले महीने सार्वजनिक किया था. श्रीनगर में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के अन्य प्रस्तावों पर विचार करने को तैयार हैं, लेकिन अभी वे भी स्पष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा, "मैंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से यह स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा में फेरबदल हमें स्वीकार नहीं हैं. ऐसा कोई भी प्रस्ताव जिसमें और विभाजन की बात हो वह हमें मंज़ूर नहीं." मुशर्रफ़ का प्रस्ताव पिछले महीने परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर का पुनर्गठन करने और वहाँ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और बढ़ाने का सुझाव भी रखा था.
उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में सात अलग-अलग भाषाई, भौगोलिक और धार्मिक इकाइयाँ हैं. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान को यह तय करना है कि कौन सी इकाई किसके पास रहनी चाहिए और किसे स्वायत्त घोषित कर देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि स्वायत्त हिस्से को संयुक्त राष्ट्र के अधीन या फिर दोनों देशों की संयुक्त निगरानी में रखा जा सकता है. लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कह दिया कि धर्म के आधार पर भारत का दोबारा विभाजन नहीं होगा. इससे पहले श्रीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए 24 हज़ार करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. उन्होंने कश्मीर के ऐसे सभी गुटों को बातचीत का न्यौता दिया जो हिंसा छोड़कर बातचीत में शामिल होना चाहते हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का दौरा ऐसे समय हो रहा है जब कश्मीर से सैनिकों की संख्या में कमी भी की जा रही है और इसकी शुरुआत भी बुधवार को ही हुई. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हालात और सुधरे तो सैनिकों की संख्या में और कमी भी की जा सकती है. |
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