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क़दीर ख़ान को कोई रियायत नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की नज़रबंदी ख़त्म करने का आदेश देने से इनकार किया है. अदालत में पेश की गई एक याचिका में अनुरोध किया गया था कि बीमार होने के कारण ख़ान के ऊपर लगी पाबंदियाँ हटा ली जाएँ. ख़ान को इस साल के शुरू में इस्लामाबाद के पास उनके घर में नज़रबंद कर दिया गया था. उन्होंने फ़रवरी में परमाणु तकनीक से जुड़ी सूचनाएँ अवैध रूप से कई देशों को देने की बात स्वीकार की थी. अदालत ने कहा कि पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के जनक ख़ान गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं. अपने एक दोस्त द्वारा दायर याचिका का क़दीर ख़ान ने ख़ुद अवैध बता कर विरोध किया था. ख़ान परमाणु तकनीक ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को देने की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन उनके अनेक समर्थक इस बात पर विश्वास नहीं करते. पिछले दिनों प्रकाशित एक किताब में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि नज़रबंद किए जाने के बाद डॉ. ख़ान का स्वास्थ्य लगातार ख़राब होता जा रहा है. किताब के लेखक ख़ान के पारिवारिक मित्र माने जाते हैं. कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हुसम उल हक़ ने आरोप लगाया है कि सरकार ख़ान के स्वास्थ्य के बारे में पुष्ट जानकारी नहीं दे रही है. याचिका पर क़दम उठाते हुए अदालत ने रजिस्ट्रार को परमाणु वैज्ञानिक को देख कर उनकी हालत के बार में रिपोर्ट देने को कहा था. रजिस्ट्रार ने अदालत को बताया कि ख़ान ने कहा है कि याचिका उनकी सहमति के बिना दायर की गई, और उनकी ठीक ढंग से देखभाल हो रही है. बाद में हक़ के एक वकील ने कहा कि याचिका वापस ले ली गई है. |
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