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सोमवार, 18 अक्तूबर, 2004 को 12:01 GMT तक के समाचार
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बढ़े नागरिकता आवेदन शुल्क पर नाराज़गी

राजस्थान में पाकिस्तान से आए हिंदू
पाकिस्तान में अच्छा व्यवहार न होने की वजह से ये लोग भारत आ गए थे
भारत सरकार के एक निर्णय ने पाकिस्तान से आए हज़ारों हिन्दुओं को परेशानी में डाल दिया है.

केन्द्र सरकार ने यकायक भारतीय नागरिकता के आवेदन शुल्क में जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर दी है. इससे पाकिस्तान के हिन्दू नागरिकों में नाराज़गी भी है.

इन नाराज हिन्दुओं ने कहा है कि उनमें से कोई भी बढ़ी हुई दरों के साथ नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करेगा.

केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने गत सप्ताह एक फ़रमान जारी कर नागरिकता आवेदन शुल्क में कई गुना बढ़ोत्तरी कर दी थी.

पहले भारत की नागरिकता के लिए विभिन्न श्रेणियों में पाँच सौ रूपया अधिकतम फीस थी.

इसे अब बढ़ाकर अलग-अलग मदों में तीन हज़ार से दस हज़ार रूपए कर दिया गया है.

आरोप

भारत ने इसी वर्ष समय-समय पर पाकिस्तान से आकर गुजरात और राजस्थान में बसे हिन्दुओं के लिए नागरिकता का रास्ता खोला था. लेकिन सरकार के इस ताज़ा निर्णय से इन हिन्दुओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.

इन हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें हतोत्साहित कर रही है.

अपनी व्यथा बयान करने सीमावर्ती इलाकों से जयपुर आए इन हिन्दुओं ने आन्दोलन छेड़ने की धमकी दी है. इन हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले पाक विस्थापित संघ के अनुसार गुजरात और राजस्थान में ऐसे हिन्दुओं की संख्या पन्द्रह हज़ार से ज़्यादा है.

 जब लालकृष्ण आडवाणी और सोनिया गाँधी को मामूली शुल्क पर नागरिकता दी गई है तो हम गरीबों पर यह भार क्यों?
हिंदू सिंह सोठा

संघ के अध्यक्ष हिन्दू सिंह सोठा के अनुसार 1965 में भारत-पाक जंग के दौरान पाकिस्तान के सिंध प्रांत से कई हज़ार हिन्दू भारत आये थे. फिर 1971 के युद्ध के वक़्त 70 हजार हिन्दू सीमा पारकर भारत आए और वापस कभी नहीं लौटे. इनमें से लगभग सभी को नागरिकता मिल चुकी है.

लेकिन 1990 के बाद फिर पाकिस्तान से पलायन का क्रम प्रारंभ हुआ जो अब तक जारी है.

श्री सोठा कहते हैं, "हिन्दू पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव से परेशान होकर भारत का रूख़ कर रहे हैं. इनमें से 80 प्रतिशत या तो दलित हैं या आदिवासी. इसीलिए कोई भी सरकार इनकी चिंता नहीं कर रही है."

पाकिस्तान के रहीमयार ख़ान जिले से चार माह पूर्व भारत आए जयसल कहते हैं कि वहाँ अल्पसंख्यकों का कोई भविष्य नहीं है.

लौटना नहीं चाहते

ये सभी हिन्दू वैध यात्रा दस्तावेजों के साथ भारत आते हैं और फिर लौटना नहीं चाहते.

राजस्थान में बसे पाकिस्तान से आए हिंदू
कई महिलाओं के लिए बढ़ी हुई फ़ीस देना कठिन होगा

सूबा सिंह के सांगड़ जिले से आई सीता देवी कहती हैं कि वे भारत की धरती पर प्राण त्याग देंगी, लेकिन पाकिस्तान नहीं लौटेंगी. सिंध छोड़कर भारत आई सविता कहती हैं कि उनके पति का निधन हो चुका है और उन पर पांच बच्चों का भार है. ऐसे में प्रत्येक सदस्य के आवेदन के साथ 5 हजार रूपए देना उसके बूते से बाहर की बात है.

ये हिन्दू पश्चिमी राजस्थान के शहरों में दयनीय हालत में रहते हैं और एक-एक दिन की रोटी के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है.

ऐसे में नागरिकता के लिए बड़ी राशि जुटाना कठिन हो गया है. इनके नेता हिन्दू सिंह सोठा पूछते हैं, "जब लालकृष्ण आडवाणी और सोनिया गाँधी को मामूली शुल्क पर नागरिकता दी गई है तो हम गरीबों पर यह भार क्यों?"

धरती पर जब भी विभाजन की लकीरें खींची जाती हैं, इंसानियत भी जात विरोधी और मज़हब के साँचों में बाँट दी जाती है.

अपने पुश्तैनी गाँव-घर से दर बदर हुए इऩ लोगों को भी शायद अपने हिस्से के साँचे की तलाश है.

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