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सेक्स कांड में फँसी तमिलनाडु की पुलिस

जयलक्ष्मी
जयलक्ष्मी के बारे में पुलिस का कहना है कि उन्होंने अपने अपहरण का नाटक ख़ुद रचा था
तमिलनाडु में इन दिनों एक सेक्स स्कैंडल ने हड़कंप मचा रखा है और बात सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुँची है.

दिलचस्प ये है कि इस मामले में पुलिस के आला अफ़सरों पर आरोप लगाए गए हैं और पुलिस विभाग मामले की जाँच सीबीआई को देने का विरोध कर रहा है.

32 वर्ष की जयलक्ष्मी का आरोप है कि पिछले आठ सालों से पुलिस महकमे के लोगों ने उसका शारीरिक शोषण किया.

जयलक्ष्मी ने न्यायालय में एक शपथ पत्र देकर 22 पुलिसकर्मियों का नाम लिया है जिनमें एक पुलिस अधीक्षक, दो पुलिस उप अधीक्षक, 10 इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं.

उन्होंने तमिलनाडु के तीन मंत्रियों के निजी सचिवों का भी नाम लिया है.

सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर की तारीख़ तय की है.

निष्पक्ष जाँच का सवाल

जब जयलक्ष्मी ने न्यायालय में शपथ पत्र दिया और इसकी चर्चा होने लगी तब मामले की नज़ाकत को समझते हुए प्रदेश की मुख्यमंत्री जयललिता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए.

विभागीय जाँच के बाद दो इंस्पेक्टरों, एक सब-इंस्पेक्टर और एक हेड- काँस्टेबिल को निलंबित कर दिया गया.

उधर उच्च न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण की जाँच सीबीआई से कराने के आदेश दिए.

उच्च न्यायालय का कहना है कि चूँकि इस मामले में पुलिस ख़ुद जुड़ी हुई है इसलिए उससे उम्मीद नहीं की जा सकती कि जाँच निष्पक्ष हो पाएगी इसलिए जाँच का काम किसी बाहरी एजेंसी को सौंप देना चाहिए.

पुलिस महकमा इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने को राज़ी नहीं है.

तमिलनाडु पुलिस ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस महकमा पहले से ही जाँच कर रहा है इसलिए सीबीआई जाँच की आवश्यकता नहीं है.

उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया.

पर तमिलनाडु पुलिस यहीं रुकने को तैयार नहीं थी और अब उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ़ वो सर्वोच्च न्यायालय जा पहुँची.

पुलिस विभाग के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद लोगों को पूरा मामला और संदेहास्पद लगने लगा है.

तथा-कथा

यह पूरा मामला तब शुरु हुआ जब जयलक्ष्मी के पिता ने अपनी बेटी और पत्नी के लापता होने के बारे में एक टेलीग्राम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा.

जयलक्ष्मी
जयलक्ष्मी के कथित अपहरण के बाद शुरु हुआ विवाद

इसी टेलीग्राम को याचिका के रुप में स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि वह जयलक्ष्मी और उनकी माँ का पता लगाए.

पुलिस ने जयलक्ष्मी को तो ढूँढ़ कर अदालत में पेश कर दिया लेकिन इसके बाद वो हंगामा शुरु हो गया जो पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया.

जयलक्ष्मी ने अपनी जो कहानी न्यायालय को बताई उसके अनुसार उसके शोषण की कहानी 1997 से शुरू होती है जब उनके साथ एक पुलिस उप अधीक्षक ने ज़बरदस्ती संबंध स्थापित किए.

इस दौरान जयलक्ष्मी अपने पहले पति से अलग रह रही थीं.

वो बताती हैं, "उन दिनों मैं मार्केटिंग का काम कर रही थी जब इस पुलिस उप अधीक्षक से मेरी मुलाक़ात हुई. इस पुलिस अधिकारी ने मुझे अपना 'व्यवसाय बढ़ाने' के लिए अपने दोस्तों के साथ सोने के लिए विवश किया."

जयलक्ष्मी के अनुसार इस अधिकारी के उनके साथ शादी रचाने का नाटक भी किया. हालांकि इस अधिकारी की शादी हो चुकी थी और उसकी पत्नी-बच्चे अधिकारी के पैतृक निवास पर रह रहे थे.

उनका कहना है कि अपने आप को पुलिस महकमे के शोषण से बचाने के लिए उन्होंने पुलिस अधीक्षक के सामने न्याय की गुहार लगाई पर वहाँ भी उन्हें शारीरिक संबंध स्थापित करना पड़ा.

जयलक्ष्मी स्वीकार करती हैं कि बाद में रज़ामंदी से वे उनके साथ संबंध बनाती रहीं और कई व्यावसायियों और राजनीतिकों का 'मनोरंजन' करती रहीं.

जयलक्ष्मी ने कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी उनके साथ शादी करने का आरोप लगाया है.

पुलिस का पक्ष

लेकिन पुलिस का दावा है कि जयलक्ष्मी कोई असहाय महिला नहीं है और वो अपने व्यावसायिक फ़ायदे के लिए शारीरिक संबंध स्थापित करती रही हैं.

उनका कहना है कि जयलक्ष्मी के दूसरे पति ने शिकायत की थी कि उनको धोखा देकर जयसक्ष्मी ने शादी की जबकि पहली शादी से उनके दो बच्चे थे.

जयलक्ष्मी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने पुलिस विभाग में अपने रिश्तेदार होने की बात कहकर कई लोगों को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का झाँसा भी दिया.

उन्होंने कथित रुप से एक इंस्पेक्टर को अच्छी पोस्टिंग का लालच देकर 50 000 रुपए वसूले और एक कथित रुप से एक व्यापारी को अमरीकी वीज़ा दिलाने का वादा करके 20 000 रुपए ले लिए थे.

इस आरोप प्रत्यारोप के बीच मामला उलझता जा रहा है और अब नज़रे सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हुई हैं.

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