|
लोकपाल: राष्ट्रपति से सहमत प्रधानमंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सहित सभी सार्वजनिक पदों पर काम करने वालों को लोकपाल के तहत लाने पर व्यापक तौर पर सहमति है. इससे पहले राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी राष्ट्रपति पद को लोकपाल के तहत लाने की वकालत कर चुके हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "इस बात पर व्यापक तौर पर सहमति है कि प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर जनता के चुने लोगों को लोकपाल के दायरे में लाया जाए. इसमें सांसद, मंत्री और ख़ुद प्रधानमंत्री का पद भी शामिल हो." देहरादून में अखिल भारतीय लोकायुक्त और उपलोकायुक्त सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री ने ये बात कही है. प्रधानमंत्री का कहना था कि लोकपाल की ज़रूरत अब पहले से भी कहीं अधिक हो गई है इसलिए बिना समय गँवाए इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है. डॉक्टर सिंह का कहना था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन या यूपीए सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम में लोकपाल विधेयक लाने पर सहमति व्यक्त की गई है और सरकार सूचना के अधिकार की स्वतंत्रता का विधेयक भी लाने पर प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि ये इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि ये बात आम तौर पर स्वीकार की जाती है कि भ्रष्टाचार की एक प्रमुख वजह सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की कमी है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||