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साहित्यकार मुल्कराज आनंद नहीं रहे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अंग्रेज़ी साहित्य के क्षेत्र के प्रख्यात लेखक मुल्कराज आनंद का निधन हो गया है. वे 99 वर्ष के थे और उन्होंने पुणे में मंगलवार सुबह को अंतिम साँस ली. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उनके घर फ़ोन कर प्रख्यात लेखक के निधन पर शोक प्रकट किया. मुल्कराज आनंद पुणे के लोनावाला-खंडाला इलाक़े में रहते थे. उनके परिवार में पत्नी और बेटी हैं. मुल्कराज आनंद के जीवन का एक अच्छा-ख़ासा वक़्त ब्रिटेन में बीता. जन्म और शिक्षा मुल्कराज आनंद का जन्म 12 दिसंबर 1905 को पेशावर में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है. अमृतसर में प्रारंभिक शिक्षा और फिर पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री लेने के बाद वे ब्रिटेन चले आए. उन्होंने वहाँ युनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन तथा केंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर पीएचडी की उपाधि हासिल की. साहित्य
साहित्य जगत में मुल्कराज आनंद का नाम हुआ उनके उपन्यास अनटचेबल्स से जिसमें उन्होंने भारत में अछूत समस्या पर बारीक और ठोस चित्रण किया. अनटचेबल्स की भूमिका लिखी थी प्रख्यात अंग्रेज़ी लेखक ई एम फ़ोर्स्टर ने. अपने अगले उपन्यासों कुली, टू लीव्स एंड अ बड, द विलेज, अक्रॉस द ब्लैक वाटर्स और द सोर्ड एंड द सिकल में भी उन्होंने पीड़ितों की व्यथा को उकेरा. भारत की आज़ादी के लिए जारी संघर्ष से प्रभावित होकर मुल्कराज आनंद 1946 में भारत लौट गए. वहाँ रहकर उन्होंने साहित्य की लगभग हर विधा में लिखा. भारत में रचा गया उनका सबसे प्रमुख उपन्यास था द प्राइवेट लाइफ़ ऑफ़ ऐन इंडियन प्रिंस. |
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