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चांडी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उम्मन चांडी ने केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. तिरुअनंतपुरम में काँग्रेस विधायक दल की बैठक में उम्मन चांडी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया, उन्होंने एके एंटनी की जगह ली है. चांडी को मंगलवार को राज्यपाल आरएल भाटिया मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई. उनके साथ शपथ लेने वाले चार मंत्री हैं--पीके कुन्हालीकुट्टी, केएम मणि, केआर गौरी और एमवी राघवन. उम्मन चांडी राज्य में सत्ताधारी संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन के संयोजक भी हैं. विधायक दल की बैठक में काँग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी, मारग्रेट अल्वा, अहमद पटेल और अनिल शास्त्री मौजूद थे. एके एंटनी के ख़िलाफ़ लंबे समय से अभियान में जुटे पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष पुरुषोत्तमन को मुख्यमंत्री पद पर बैठाने की ज़ोर-शोर से कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हुए. काँग्रेस पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के पहले सभी विधायकों से अलग-अलग बात की और फिर गठबंधन में शामिल घटक दलों के नेताओं से भी. इस्तीफ़ा रविवार को काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दौरे के बाद एके एंटनी ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी थी. उन्होंने कहा था कि वे लोकसभा चुनाव में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी ले रहे हैं. राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एंटनी ने कहा था, "मैं हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर काम करता हूँ. इस बार भी मैंने ऐसा ही किया है." उन्होंने कहा कि वे लोकसभा चुनाव में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की भी नैतिक ज़िम्मेदारी ले रहे हैं. वैसे प्रदेश काँग्रेस इकाई में गुटबाज़ी को भी एंटनी के त्यागपत्र की प्रमुख वजह माना जा रहा है. वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री करुणाकरण मंत्रिपरिषद और पार्टी में अपने समर्थकों को जगह दिलाने के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को कई बार धमकी दे चुके हैं. रविवार को भी करुणाकरण के पुत्र मुरलीधरण ने एक ज्ञापन काँग्रेस अध्यक्ष को सौंपा था. |
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