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रविवार, 22 अगस्त, 2004 को 11:44 GMT तक के समाचार
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भारतीय 'सारस' की विश्व बाज़ार पर नज़र
सारस
सारस को विकसित करने में 14 साल लगे
भारत में बने पहले यात्री विमान 'सारस' ने रविवार को बंगलौर में पहली 'आधिकारिक' उड़ान भरी.

बंगलौर में लगभग 20 मिनट की इस उड़ान के समय केंद्रीय विज्ञान और तकनीक राज्य मंत्री कपिल सिबल मौजूद थे.

इस विमान को वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर के के वेणुगोपाल ने उड़ाया.

14 सीटों वाले सारस विमान को बंगलौर की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज़ ने बनाया है और इसमें 14 वर्ष लगे हैं.

29 मई को सारस ने पहली बार बंगलौर में परीक्षण उड़ान भरी थी.

उम्मीद की जा रही है कि सारस को हवाई एम्बुलेंस, एयर टैक्सी, कूरियर विमान और निजी विमान की तरह उपयोग में लाया जा सकेगा.

भविष्य की उड़ान

 अगले 10 वर्षों में विमानन उद्योग 1000 अरब रूपए तक फैल जाएगा. भारत इस उद्योग का हिस्सा होना चाहता है
कपिल सिबल, एएफ़पी

एजेंसियों के अनुसार कपिल सिबल ने पत्रकारों से कहा कि सारस भारत के भविष्य की ओर एक उड़ान है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार कपिल सिबल ने कहा,"अगले 10 वर्षों में विमानन उद्योग 1000 अरब रूपए तक फैल जाएगा. भारत इस उद्योग का हिस्सा होना चाहता है".

हालाँकि किसी भी सार्वजनिक उपयोग से पहले इस विमान को नागरिक विमानन महानिदेशक (डीजीसीए) से प्रमाण पत्र लेना होगा, जिसके लिए विमान को 500 घंटों की उड़ान भरनी होगी.

यह प्रक्रिया 2007 तक पूरी हो जाने की उम्मीद है.

इसके बाद सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि इस विमान का व्यावसायिक उत्पादन करना है या नहीं.

वैसे केंद्रीय मंत्री कपिल सिबल ने उम्मीद जताई है कि 2010 तक सारस का उत्पादन शुरू हो जाएगा.

देरी

14 सीटों वाले सारस विमान परियोजना की शुरुआत 1991 में रुस की सहायता से हुई थी.

1998 में परमाणु परीक्षण करने के बाद जब अमरीका ने प्रतिबंध लगा दिए तो इस परियोजना में देर होती दिखी.

इसके बाद 1999 में सरकार ने इस परियोजना को एक अलग केंद्र बनाकर आगे बढ़ाने और ख़ुद विमान बनाने का निर्णय लिया.

'सारस' को पिछले साल एक प्रदर्शनी में लोगों के सामने लाया गया था और उम्मीद की जा रही थी कि पिछले साल गर्मियों में ही इसका परीक्षण हो जाएगा.

लेकिन इसमें विलंब होता गया और लगभग एक साल बाद इसका परीक्षण हो सका.

सारस का वज़न 5,118 किलो है और यह अमरीका में बन प्रैट एंड वीटनी इंजन से उड़ता है.

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