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ऐसी भी है एक नाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आप के लिए शीतल पेय पदार्थों की खाली बोतलें, पुराना तिरपाल और शमशान घाट पर फ़ेंके गए बाँस केवल कूड़ा-कचरा भर हो सकते हैं पर बनारस के एक नाव वाले, भइयालाल निषाद के लिए यह उनकी रोजी-रोटी कमाने और अपनी रचनात्मकता को आकार देने का जरिया हैं. उनकी इस रचनात्मकता का जीता-जागता उदाहरण है उनकी नाव जो महज छह फुट लंबी और ढाई फुट चौड़ी है. भइयालाल की मानें तो इस तरह की नावों में यह दुनिया की सबसे छोटी नाव है. अपनी इस अनोखी नाव के बारे में भइयालाल बताते हैं, इसे बाँस की फर्चियों के फ़्रेम पर तिरपाल लगाकर बनाया है. यह ढाँचा पानी में तैर सके, इसके लिए इसकी तली पर पेप्सी की खाली बोतलों को आपस में जोड़कर लगाया गया है. ख़ासियत भइयालाल इस नाव से सावन की उफनती हुई गंगा नदी को आसानी से पार कर जाते हैं. पर ख़ासियत बस इतनी भर नहीं है. इस नाव में एक सीडी प्लेयर लगा है, ट्राँजिस्टर है, 27 छोटे बल्बों की जगमगाती लड़ी है, टीवी है और एक सायरन है जो चप्पू चलाने पर बजता है.
यही वजह है कि यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों को यह नाव खूब भाती है और इससे भइयालाल की रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाता है. वो बताते हैं, "इस नाव को पर्यटक ख़ूब पसंद करते हैं और खुश होकर इनाम भी देते हैं." नाव में लगी सभी पेप्सी की बोतलों से नाव तो चल रही है पर एक भी बोतल पर पेप्सी का लेबल नहीं लगा था. हमने जब भइयालाल से इसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया, "पेप्सी की बोतलें ज़रूर हैं, पर ये कूड़े में पड़ी थीं. अब इससे पेप्सी का मुफ़्त में विज्ञापन क्यों करूँ." "जब पेप्सी वाले सचिन को विज्ञापन के लिए एक मोटी रकम दे सकते हैं तो मैं भी बिना पैसे लिए मुफ़्त में विज्ञापन नहीं करूँगा." कारनामे 40 वर्षीय भइयालाल अपनी नई नई खोजों के चलते हमेशा से ही अख़बारों में जगह पाते रहे हैं.
पिछले दिनों उन्होंने अपने हाथ-पैर बाँधकर और पेट पर चार किलो का वजन रखकर गंगा तैर कर पार की थी. इस करतब को हज़ारों लोगों की भीड़ ने देखा. इन दिनों वो एक ऐसे ग्लाइडर के निर्माण में व्यस्त हैं जिसमें न तो किसी ऊँचे स्थान से कूदने की ज़रूरत होगी और न ही किसी स्वचालित मोटर की. वो दावा करते हैं कि लगभग 42 मीटर कपड़े से तैयार हुआ यह ग्लाइडर हवा में खुद-ब-खुद गोते भरेगा. हालाँकि सरकार ने अबतक इस निरक्षर वैज्ञानिक पर न तो कोई ध्यान दिया है और न ही इसकी कोई सहायता ही की है पर भइयालाल मानते हैं कि उनके कारनामों की ख़बरों की कतरन और यह नाव उनके सपनों को साकार करेगी. |
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