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वाइको के ख़िलाफ़ पोटा के मामले वापस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु सरकार ने एमडीएमके नेता वाइको के ख़िलाफ़ आतंकवाद निरोधक क़ानून पोटा के तहत दर्ज मामले वापस लेने का फ़ैसला किया है. वाइको के साथ-साथ उनके आठ अन्य समर्थकों के ख़िलाफ़ भी मामला वापस ले लिया गया है. तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के पक्ष में कथित भाषण देने के आरोप में वाइको और उनके समर्थकों को पोटा के तहत गिरफ़्तार किया गया था. भारत में एलटीटीई पर पाबंदी है. इस साल फरवरी में ही वाइको डेढ साल जेल में रहने के बाद ज़मानत पर छूटे थे. केंद्र की पूर्व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा गठित एक समीक्षा समिति ने भी कहा था कि प्रतिबंधित संगठन के पक्ष में बयान देने भर को आतंकवाद की कार्रवाई नहीं समझा जाना चाहिए. राज्य सरकार ने पहले वाइको और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ मामला वापस लेने से मना कर दिया था. एमडीएमके नेता वाइको ने पोटा के तहत दर्ज मामले वापस लेने के फ़ैसले को अपनी जीत बताया है. उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित थे. |
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