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बांग्लादेश पर सहयोग न करने का आरोप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) का कहना है कि बांग्लादेश के अधिकारी उनके साथ पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं. बीएसएफ़ के इंस्पेक्टर जनरल एससी श्रीवास्तव ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि भारत में सक्रिय विद्रोही गुटों का सफ़ाया करने के अभियान में भारत को बांग्लादेश से सहयोग नहीं मिल रहा है. पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय कई बड़े अलगाववादी संगठनों के अड्डे बांग्लादेश में हैं, यह दावा भारतीय अधिकारी लंबे समय से करते रहे हैं. बीएसएफ़ का कहना है कि बांग्लादेश के अर्धसैनिक बल बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) को भारत ने लगभग 200 छापामार अड्डों की सूचना दी थी लेकिन उनसे कोई सहयोग नहीं मिला है. एससी श्रीवास्तव का कहना है कि अलगाववादी चरमपंथियों के कैंपों के बारे में सूचना हाल में हुए वार्षिक सम्मेलन के दौरान दी गई थी. बीएसएफ़ का कहना है कि बांग्लादेश के अधिकारियों ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई और बदले में 29 बांग्लादेशी अपराधियों की सूची सौंप दी जिनके बारे कहा जाता है कि वे भारत में छिपे हुए हैं. बांग्लादेश इन आरोपों का खंडन करता है कि भारत के अलगाववादी चरमपंथी उनके इलाक़े में शरण लेते हैं. लेकिन भारत अपने दावों को दोहराता रहा है, उसका कहना है कि असम और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उल्फ़ा, बोडो और एटीटीफ़ जैसे संगठनों के नेता बांग्लादेश में छिपते रहते हैं. कई प्रमुख भारतीय चरमपंथी नेता बांग्लादेश में गिरफ़्तार किए जा चुके हैं जिनमें उल्फ़ा के पूर्व महासचिव भी शामिल हैं जो इन दिनों बांग्लादेश की ही जेल में बंद हैं. |
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