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टिहरी दुर्घटना में मृतकों की संख्या 24 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरांचल राज्य के टिहरी ज़िले में सुरंग धंस जाने से मरनेवालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है. ये दुर्घटना मंगलवार को टिहरी में उस बाँध के निर्माण की जगह हुई जिसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. मरनेवालों में 23 मज़दूर और एक वरिष्ठ इंजीनियर शामिल हैं. टिहरी के ज़िलाधिकारी पुनीत कौशल ने बीबीसी को बताया कि छह और लोगों का पता नहीं चल सका है और उनके बचने की संभावना कम ही है. उन्होंने कहा कि दुर्घटना के वक़्त उस सुरंग में लगभग 85 मज़दूर काम कर रहे थे. लगभग 50 लोग बचकर निकलने में सफल रहे जिसमें 15 लोगों को चोटें आईं. दुर्घटनास्थल पर राहत का काम चल रहा है और अधिकारियों का कहना है कि मलबे को हटाने में तीन दिन लगेंगे. सुरंग और जाँच 700 मीटर गहरी सुरंग एक साल पहले खोदी गई थी जिसमें काम चल रहा था. सोमवार रात कुछ बड़ी चट्टानें और मलबा सुरंग पर आ गिरे जिससे सुरंग धंस गई. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस घटना की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पी एम सईद बुधवार को दुर्घटनास्थल का दौरा करने पहुँच रहे हैं. विवादास्पद बाँध टिहरी बाँध के निर्माण को लेकर बड़ा भारी विवाद हुआ था. पर्यावरणवादियों की दलील थी कि ये बाँध ख़तरनाक है क्योंकि जिस क्षेत्र में इसे बनाया जा रहा है वह भूकंप की आशंका वाला क्षेत्र है. 261 मीटर ऊँचा टिहरी बाँध एशिया का सबसे ऊँचा बाँध माना जाता है. तीन साल पहले भी यहाँ ऐसा ही एक हादसा हुआ था. तब एक सुरंग के धंसने से 16 मज़दूर ज़िंदा दफ़न हो गए थे. टिहरी परियोजना से 24000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाना है. मगर टिहरी परियोजना के कारण क्षेत्र में 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की एक बड़ी झील बन रही है जिसके कारण पूरा टेहरी शहर और लगभग 125 गाँव डूब गए हैं. इस परियोजना के कारण लगभग एक लाख लोग विस्थापित हो गए हैं. |
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