BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 02 अगस्त, 2004 को 14:21 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
चीनियों को भारतीय आम का चस्का

चीन में भारतीय आम
डब्बा खोलने के कुछ ही देर बाद सारे आम बिक गए
चीन के बाज़ार में भारतीय आमों को मिली ज़बर्दस्त सफलता से भारतीय अधिकारी बेहद उत्साहित हैं.

अधिकारियों और निर्यातक व्यापारियों का दल हाल ही में चीन के बीजिंग और शंघाई शहरों में आम का प्रचार और व्यापार करके लौटा है.

इनका कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन के विशाल बाज़ार में भारतीय कृषि उत्पाद के निर्यात की अपार संभावनाएँ हैं.

एक निर्यातक रजनीश सेठी ने बीबीसी को बताया, "एक बहुत बड़ी बात बीजिंग में यह हुई कि साढ़े तीन टन आम चीनियों ने दो घंटे में पूरा ख़रीद लिया. जो तीन दिन की प्रदर्शनी के लिए ले गए थे, वह सब तीन घंटे में बिक गया."

इन लोगों ने अपने स्टॉल लगा कर आम को पहले काट कर तश्तरियों में चखने के लिए पेश किया.

 बीजिंग में साढ़े तीन टन आम चीनियों ने दो घंटे में पूरा ख़रीद लिया. जो तीन दिन की प्रदर्शनी के लिए ले गए थे, वह सब तीन घंटे में बिक गया.
रजनीश सेठी

सेठी का कहना है कि चीनियों को अभी तक अपने देश के अलावा थाइलैंड और फिलीपींस के आम खाने को मिलते थे. इसके मुक़ाबले भारतीय आम मीठे और विशेष स्वाद वाले हैं.

इसलिए आम चखने के बाद तुरंत चीनी महिलाओं ने सारे आम ख़रीद डाले, वह भी 125 से 150 रुपये किलो के ऊँचे दामों पर.

उत्साहित सेठी कहते हैं, "अगले साल कुछ नहीं तो 500 टन आम चीन भेज सकेंगे."

बाज़ार खुला

वर्ष 2001 में विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बनने के बाद ही चीन ने अपने बाज़ार खोले हैं.

भारतीय आमों के निर्यात के लिए चीन और भारत ने पिछले साल समझौता किया. लेकिन कृषि उपज के आयात के संबंध में चीनी क़ानून बहुत कठोर हैं.

चीनी अधिकारियों का एक दल पिछले साल यहाँ आम के बागों और पैकिंग हाउस वगैरह का निरीक्षण करने आया था.

राज्य के कृषि विदेश व्यापार विभाग के सचिव अनिल स्वरूप का कहना है कि कृषि उत्पादों में इस तरह का क़्वालिटी कंट्रोल यहाँ एक नया अनुभव था.

News image
अनिल स्वरूप कहते हैं कि क़्वालिटी कंट्रोल स्थानीय किसानों के लिए नई बात है

गुणवत्ता क़ायम रखने के लिए लखनऊ और सहारनपुर के आसपास के सभी 10 ज़िलों में 50-50 किसान चुने गए हैं जिन्हें फ़सल आने के पहले और बाद का सारा ज़रूरी प्रशिक्षण दिया गया है. इसमें कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानी विशेष है.

कृषि वैज्ञानिक और निर्यातक दल के सदस्य रवीन्द्र कुमार तोमर का कहना है कि आम को रोगमुक्त रखने के लिए चीनी अधिकारियों ने उसे एक घंटे तक 48 डिग्री गरम पानी में रखने की शर्त लगाई थी और यह सबसे मुश्किल काम था.

दरअसल ऐसा करने से आम पर फ़्रूट फ़्लाई या कीट का असर नहीं होता.

अवसर और कठिनाइयाँ

उत्तर प्रदेश सरकार ने आम और अपने दूसरे कृषि उत्पादों का 'नवाब' ब्रांड नाम दिया है जो कि लखनऊ की संस्कृति का भी परिचायक है.

अनिल स्वरूप का कहना है कि नवाब नाम से बेहतर पैकिंग वाला आम आने से भारत के ऊँचे बाज़ार में भी नई जगह बनी. रिलायंस और टाटा जैसी कंपनियों ने इन्हें उपहार देने के लिए ख़रीदा.

भारतीय अधिकारी इस साल हाथों-हाथ चीन में आम बिकने से उत्साहित तो हैं लेकिन बड़े पैमाने पर निर्यात में अभी कई कठिनाइयाँ हैं.

पहली तो यह कि चीन में क़रीब 33 फ़ीसदी उत्पाद और व्यापार कर आदि पड़ता है. दूसरे वायु मार्ग से क़रीब 60 रुपये किलो ढुलाई ख़र्च पड़ता है.

निर्यातक सेठी का कहना है कि अगर पानी के जहाज़ से चीन आम भेजने की व्यवस्था हो जाए तो ढुलाई भाड़ा घटकर क़रीब चौथाई रह जाएगा.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>