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पंखे वाला चित्रकार जतिन दास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जतिन दास की प्रसिद्धि भारत के प्रमुख समकालीन पेंटर के रूप में है. अनेक लोग एक पेंटर के अलावा उन्हें अभिनेत्री नंदिता दास के पिता के रूप में भी जानते हैं, लेकिन शायद ज़्यादा लोगों को ये पता नहीं कि जतिन दास पुरानी कलात्मक चीज़ों के बड़े संग्रहकर्ता भी हैं, और उनके पास हाथ पंखों का एक विशाल संग्रह है. दास के दुर्लभ संग्रह में देश-विदेश के क़रीब 5000 हाथ पंखे हैं. कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल संग्रहालय में पिछले दिनों उनके पंखा संग्रह को आमलोगों के लिए प्रदर्शित किया गया है. दास के संग्रह में भारत के विभिन्न राज्यों के पंखों के अलावा दक्षिण एशियाई देशों के पंखे, बर्मा, जापान, कोरिया, चीन, इंडोनेशिया के पंखे, और दक्षिण अमरीका और अफ़्रीका के रंग-बिरंगे बहुआयामी पंखे मौजूद हैं.
उन्होंने साधारण ताड़ के पत्ते से लेकर सोने-चांदी के धागे से बुने पंखे, कपड़ों पर कशीदाकारी किये हुए पंखे से लेकर मोरपंख से बने पंखे, मोती और शीशे का काम किये हुए पंखे से लेकर तांबे-चांदी से बने मंदिरों मे रखे जाने वाले पंखे, हर तरह के हाथ पंखे जुटा रखे हैं. जतिन दास ने बताया कि हाथ पंखों के संग्रह में उन्हें पूरे 24 साल लगे हैं. उन्होंने कहा, "अपने संग्रह के लिए मुझे देश के हर प्रांत की ही नहीं, बल्कि विदेशों तक की खाक छाननी पड़ी." दास ने कहा, "मुझे ज़्यादातर पंखे खरीदने पड़े और इसके लिए कई बार अपनी पेंटिंग्स भी बेचनी पड़ी." यह पूछे जाने पर कि क्या इस संग्रह के लिए उनका नाम किसी रिकॉर्ड बुक में शामिल किया गया है, उन्होंने कहा कि उन्होंने नाम कमाने या रिकॉर्ड बनाने के लिए हाथ पंखों का संग्रह शुरू नहीं किया.
दास ने बताया कि उनकी दिलचस्पी कांसे के बर्तन, पेंटिंग आदि उस हर चीज़ के संग्रह में है जिनके लोप होने का ख़तरा है. दिल्ली के बाद प्रदर्शनी के लिए कोलकाता आये जतिन दास के अनुसार कई राज्यों में उनकी इस प्रदर्शनी के लिए पर्याप्त गैलरी नहीं है. वैसे, उनकी योजना अगले महीने हैदराबाद में हाथ पंखों की प्रदर्शनी लगाने के अलावा भविष्य में विदेशों में अपना संग्रह प्रस्तुत करने की भी है. उन्होंने भुवनेश्वर में एक संग्रहालय बनाने की अपनी योजना का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि उड़ीसा सरकार ने संग्रहालय के लिए ज़मीन आवंटित कर दिया है और भवन के लिए धन जुटाने में कई कलाकार उनकी मदद कर रहे हैं. दो रुपये से अस्सी हजार तक मूल्य वाले पंखों के संग्रहकर्ता जतिन दास का मानना है कि गर्मी से पंखे नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इनको सहेजकर रखना कठिन काम है. |
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