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सबसे बुज़ुर्ग सांसद का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सबसे अधिक उम्र के सांसद रामचंद्र वीरप्पा का सोमवार को कर्नाटक में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. वीरप्पा का गुर्दे की ख़राबी से रविवार को निधन हो गया था. वह 94 वर्ष के थे और भारतीय संसद में सबसे लंबी उम्र के सदस्य थे. पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और भारतीय जनता पार्टी के अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने उनकी अंत्येष्टि में हिस्सा लिया. स्वतंत्रता सेनानी रह चुके वीरप्पा 2004 के चुनावों में लगातार पाँचवीं बार लोकसभा में चुन कर आए थे. वह लोकसभा में कर्नाटक के बीदर संसदीय चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे.
उन्होंने कुछ समय पहले बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा था कि वह अपना सौवाँ जन्मदिन एक सांसद के रूप में मनाना चाहते हैं. बचपन से ही खेत में कठोर परिश्रम करने वाले वीरप्पा कभी स्कूल नहीं जा पाए. स्वतंत्रता सेनानी ब्रिटिश राज के दौरान उन्होंने काँग्रेस के नेतृत्व में आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया और उन्हें कालेपानी की सज़ा हुई. भारत की आज़ादी के बाद उन्होंने अपने चुनावी जीवन का सफ़र शुरु किया 1952 में और तब से राजनीति में सक्रिय रहे. जब उन्हें 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे भाजपा की विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल नहीं हुए थे. उनका कहना था कि काँग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया इसलिए भाजपा में शामिल हो गए. वीरप्पा दलित थे लेकिन उन्हें ब्राह्मण और लिंग्यत समुदायों का समर्थन मिलता रहा है. |
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