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अपने तेरहवीं के लड्डू ख़ुद बाँटे दादी ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ढोल की गूंज पर नाचते रिश्तेदारों और उड़ते अबीर-गुलाल के बीच हरियाणा की 102 वर्षीय चंद्रो देवी ने अपनी मौत के बाद होने वाले संस्कारों को अपने सामने ही पूरा करवाया. बेहद मामूली परिवार में जन्मी चंद्रो देवी ने अकेले ही कड़ी मेहनत-मशक्कत करते हुए ज़िंदगी की गाड़ी खींची. उनके पति छोटी उम्र में ही मानसिक रूप से बीमार हो गए थे. दुखभरी ज़िंदगी का सुखद अंत देखने के लिए उन्होंने अपनी ये इच्छा पूरी की. उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, "अब कोई इच्छा बाक़ी नहीं रही. कल का कुछ पता नहीं, इसीलिए आज ही सब कुछ कर लिया. भगवान से सबके लिए ख़ुशी माँगती हूँ." हवन यज्ञ से लेकर महाभोज तक की सभी रस्में चंद्रो देवी ने उत्साह से पूरी कीं.
कुल 51 पोतों-पड़पोतों वाली चंद्रो देवी के सबसे छोटे बेटे सूबे सैनी का दावा है कि इस समारोह में नाते-रिश्तेदारों के अलावा आसपास के गाँवों के लगभग दस हज़ार लोग शामिल हुए. इस मौके पर 60 साल से अधिक उम्र वाले सूबे सैनी फूट-फूटकर रो पड़े. उन्होंने बताया कि बचपन में चाय के ढाबे और हलवाई की दुकान पर काम करते हुए उन्होंने बड़ी मुश्किलें सही. आज वो एक जूते के कारखाने और तीन दुकानों के मालिक हैं. अपनी सफलता का पूरा श्रेय वो अपनी माँ को देते हैं. सूबे सैनी कहते हैं, "मैंने मज़दूर माँ की आत्मा की ख़ुशी के लिए ये सब किया है ताकि उसे स्वर्ग मिल सके." उनके अनुसार जिसका 'जीवन कारज' यानी जीवन कार्य हो जाता है उसे स्वर्ग नसीब होता है. बिरादरी में ख़ुशी ये 'जीवन कारज' बिरादरी की सहमति से ही किया गया. पूरे बहादुरगढ़ शहर को इसकी ख़बर थी. वहाँ रहने वाले सज्जन सिंह तो इसे ख़ुशी का ही मौका मानते हैं, "इतने सालों तक बिना किसी पर बोझ बने ज़िंदा रहना ही बड़ी बात है इसीलिए इसका जश्न तो होना ही चाहिए."
जीवन कारज करवाने आए पंडित रामअवतार शर्मा के लिए ये इस तरह का पहला मौका था. उन्हें बिस्तर, पलंग, चाँदी की गाय जैसी वो सभी चीज़ें दी गईं जो किसी की मृत्यु के बाद दी जातीं हैं. पंडित रामअवतार शर्मा का कहना था, “वैसे तो ये रस्में, दान वगैरह आत्मा की शांति के लिए होती हैं लेकिन चंद्रो देवी ने तो जीते-जी पुण्य कमा लिया.” फ़ोटो ख़िचवाने की शौकीन चंद्रो देवी पूरी तरह से फ़िट हैं सिवाय इसके कि उन्हें कुछ धुंधला-सा दिखता है. उनके मुँह में चार दाँत अब भी हैं. चंद्रो देवी को बहुत कम नींद आती है और वो रात भर भजन करतीं हैं. जीवन की ढलती शाम में चंद्रो देवी का ब्रह्म वाक्य है – “आज मैं ठीक हूँ, कल की मुझे परवाह नहीं.” |
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