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सरहद पार से जुड़े टूटे हुए तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी ने भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लोगों के बीच संपर्क सेतु स्थापित करने का एक अनूठा प्रयास किया है. बीबीसी उर्दू सेवा ने भारतीय कश्मीर और पाकिस्तानी कश्मीर में रहने वाले लोगों के तार आपस में जोड़ने के लिए वेबकास्टिंग का आयोजन किया है. यह अपनी तरह का पहला आयोजन है जिसमें दोनों तरफ़ की जनता को इस तरह का मौक़ा मिला है, यह वेबकास्टिंग तीन दिन तक चलेगी. सोमवार को भारतीय समय के मुताबिक़ साढ़े चार बजे से शुरू हुई वेबकास्टिंग में श्रीनगर और मुज़फ्फ़राबाद से कई कश्मीरी लोगों ने अपने बिछड़े हुए प्रियजनों से बातचीत की. श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच यातायात और टेलीफ़ोन संपर्क नहीं होने के कारण पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से बिछड़े हुए रिश्तेदारों और मित्रों की बातचीत या मुलाक़ात संभव नहीं है. बीबीसी उर्दू सेवा के इस प्रयास का कश्मीरी जनता ने ज़ोरदार स्वागत किया है, इसमें तीन दिनों तक एक घंटे तक चलने वाली वेबकास्टिंग में नियंत्रण रेखा के बीच बँटे हुए छह कश्मीरी परिवारों के हिस्सा लेने की संभावना है. बीबीसी संवाददाता ने मुज़फ़्फ़राबाद से बताया है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जहाँ से वेबकास्टिंग हो रही है वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई है और सैकड़ों की तादाद में लोग इसमें शामिल होने की इच्छा प्रकट कर रहे हैं. इसी तरह श्रीनगर में भी बड़ी तादाद में कश्मीरी लोग नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले रिश्तेदारों से बात करने के लिए बेचैन हैं. सोमवार को हुई वेबकास्टिंग में शामिल होने वाले परिवार के लोग बहुत ही भावुक हो गए, इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने दशकों तक एक दूसरे से बात नहीं की थी या एक दूसरे का चेहरा नहीं देखा था. अपने बिछड़े हुए रिश्तेदारों के साथ बात करते हुए ज़्यादातर लोग रो पड़े, लगभग सभी लोगों का कहना था कि भारत-पाकिस्तान के संबंधों में सुधार आने से उनका जीवन बेहतर होगा. |
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