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जाँच कमेटी बताएगी कबूतर कैसे मरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शांति के प्रतीक सफ़ेद कबूतर उड़ाने की परंपरा पुरानी है लेकिन श्रीलंका में अधिकारी कबूतर उड़ाने के फ़ैसले को लेकर भारी परेशानी में हैं. कबूतर उड़ा ही नहीं और अब आयोजक अधिकारियों की शामत आ गई है, जाँच चल रही है कि कबूतर क्यों नहीं उड़ा, इसके पीछे कोई साज़िश तो नहीं थी. पिछले शनिवार को हुए समारोह में जब एक सफ़ेद कबूतर को उड़ाया गया तो वह "पत्थर के टुकड़े की तरह" सीधे ज़मीन पर आ गिरा, कबूतर मरा हुआ पाया गया. इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग कर रहे बीबीसी के एक कैमरामैन ने कहा है कि कबूतर शायद तेज़ गर्मी के कारण मर गया था. मौक़े पर मौजूद श्रीयंता वालपोला ने कहा, "यह कबूतर उन सात कबूतरों में से एक था जिन्हें संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में विशेष अतिथि और राजनेता उड़ाने वाले थे." असल में कबूतरों को गर्मी में लगभग आधे घंटे तक रहना पड़ा जिसके बाद उन्हें उड़ाया गया, जब वे उड़े तो काफ़ी कमज़ोर दिखाई दे रहे थे.
जब नागरिक सुरक्षा मंत्री रत्नश्री विक्रमनायके की कबूतर उड़ाने की बारी आई तो आयोजकों के लिए शर्मनाक स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि कबूतर सीधा ज़मीन पर आ गिरा. अब सेना के एक मेजर के नेतृत्व में तीन अधिकारी कबूतर की रहस्यमय मौत की जाँच कर रहे हैं. श्रीलंका की सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, "बाक़ी के छह कबूतर ठीक से उड़े लेकिन नागरिक सुरक्षा मंत्री के हाथ में दिया गया कबूतर क्यों नहीं उड़ा, इस बात की जाँच की जाएगी कि इसके पीछे साज़िश तो नहीं थी." शांति के प्रति श्रीलंका सरकार की प्रतिबद्धता के प्रतीक सफ़ेद कबूतर के इस तरह धराशायी होने को कुछ लोगों ने अशुभ संकेत के रूप में भी देखा. अनेक लोगों ने अख़बारों में संपादक के नाम पत्र लिखकर आशंका जताई है कि इस घटना का मतलब है कि श्रीलंका की शांति प्रक्रिया आगे नहीं चल पाएगी. इस भारी शर्मिंदगी का एक कारण यह भी था कि कई प्रमुख विदेशी विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में मौजूद थे. |
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