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गुरुवार, 20 मई, 2004 को 12:08 GMT तक के समाचार
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कम हुई 'आर' की महिमा!

मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी दोनों के ही नाम में नहीं है 'आर' अक्षर
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने जब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया तो मुझे सहसा ही अमृतसर में भारतीय जनता पार्टी-शिरोमणि अकाली दल की वो रैली याद आ गई जिसमें एक भाजपा नेता का दावा था कि जिसके नाम में अंग्रेज़ी का 'आर' अक्षर नहीं हो वो प्रधानमंत्री नहीं बन सकता.

हालाँकि उनका वो दावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लेकर था मगर यहाँ तो मनमोहन सिंह ने ही 57 वर्ष पुराना ये मिथक तोड़ दिया.

वो रैली निवर्तमान उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की भारत उदय यात्रा के स्वागत के लिए आयोजित की गई थी और उसी में भीड़ जुटाने के दौरान एक स्थानीय भाजपा नेता ने मंच से दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकतीं क्योंकि उनके नाम में अंग्रेज़ी का 'आर' अक्षर नहीं है.

दावा सुनने के बाद मैंने मन ही मन में सारे प्रधानमंत्रियों के नामों की जाँच शुरू की और पाया कि वास्तव में ऐसा था.

पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक सबके नाम में अंग्रेज़ी का 'आर' अक्षर है.

लाल बहादुर शास्त्री के बहादुर में, इंदिरा गाँधी के इंदिरा में, मोरारजी देसाई के मोरारजी में, चौधरी चरण सिंह के चरण में, राजीव गाँधी के राजीव में, विश्वनाथ प्रताप सिंह के प्रताप में अंग्रेज़ी का 'आर' अक्षर है.

इनके अलावा चंद्रशेखर, नरसिंहाराव, एचडी देवेगौड़ा और इंदर कुमार गुजराल तक सभी के नाम में 'आर' अक्षर है.

अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी तक रहे सभी प्रधानमंत्रियों के नाम में 'आर' अक्षर रहा है

यही नहीं यहाँ तक कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नंदा के नाम में भी 'आर' अक्षर है.

अब ये सुनने के बाद मुझे भी उत्सुकता हुई कि क्या वाक़ई ये मिथक चलता ही रहेगा.

जब चुनाव नतीजे आए तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बढ़ी और लगा कि वही इसे तोड़ देंगी.

ऐसा नहीं हुआ मगर फिर भी मिथक टूटा और इसे तोड़ा मनमोहन सिंह ने जिनके नाम में कहीं 'आर' अक्षर नहीं आता.

हालाँकि अब भी ये दावा किया जा सकता है कि उनके नाम से पहले लगा डॉक्टर भी उनके नाम से जुड़ा है और उसमें तो 'आर' है इसलिए ये मिथक अभी चल ही रहा है.

इसके बाद अब शायद ये कहा जाएगा कि नेहरू-गाँधी ख़ानदान का वही सदस्य प्रधानमंत्री बन सकता है जिसके नाम में 'आर' अक्षर हो.

इससे 'आर' अक्षर को लेकर मुहिम चलाने वाले संतुष्ट हो जाएँगे कि कम से कम सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री नहीं बन रहीं मगर उन्हें ये याद रखना होगा कि सोनिया की दोनों ही संतानों प्रियंका और राहुल के नाम में 'आर' है.

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