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हिमाचल में इस बार हवा उलटी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मात्र चार सीटों वाले पहाड़ी प्रदेश, हिमाचल प्रदेश में चुनावी मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है. पिछले चुनाव में यहाँ की चारों सीटों- शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर से भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए थे. पर इस बार की हवा बिल्कुल उलट दिखती है. इसके कई कारणों में पिछले साल तक प्रदेश में रही भाजपा सरकार के प्रति लोगों की नाराज़गी और इस बार के 'इंडिया शाइनिंग' के नारे से लोगों की असहमति प्रमुख हैं. वैसे भी यहाँ का मतदाता लोकसभा चुनावों में प्रदेश में मौजूद सरकार की पार्टी का ही समर्थन करता आया है. यहाँ इस बार भी चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों की जगह स्थानीय मुद्दे ही हावी हैं. कांगड़ा ये क्षेत्र पिछली एनडीए सरकार में मंत्री रहे शांता कुमार का चुनावी क्षेत्र है. इस सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है. इस बार पार्टी की सबसे मज़बूत स्थिति यहीं पर देखने में आ रही है. लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रेश कुमार, जो कि मौजूदा प्रदेश सरकार के मंत्री हैं, भाजपा को ज़बरदस्त चुनौती दे रहे हैं. शांताकुमार के समर्थक उनके कैबिनेट मंत्री और प्रदेश मुख्यमंत्रीकाल के दौरान क्षेत्र में कराए गए कार्यों पर लोगों से वोट माँग रहे हैं. दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि शांताकुमार के कार्यकाल में काम शुरू करने की बातें तो हुईं लेकिन कोई भी काम पूरा नहीं हो सका है. भाजपा का यह भी आरोप है कि जब-जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आयी है, कांगड़ा के साथ भेदभाव ही हुआ है और केवल पुराने हिमाचल का ही विकास हुआ है. परन्तु इस प्रदेश सरकार में कांग्रेस ने आठ मंत्री इस क्षेत्र से नियुक्त किए हैं जिसकी वजह से भाजपा का यह आरोप टिक नहीं पा रहा है. मंडी मंडी में दो राजघरानों की टक्कर देखने में आ रही है. प्रदेश मुख्यमंत्री और रामपुर के राजा के नाम से जाने जाते वीरभद्र सिंह की पत्नी, प्रतिभा सिंह यहाँ से कांग्रेस की प्रत्याशी हैं. भाजपा की ओर से कुल्लू राजघराने के महेश्वर सिंह मैदान में हैं. पूर्व केंद्रीयमंत्री और हिमाचल विकास कांग्रेस के नेता सुखराम के पार्टी में वापस आ जाने से कांग्रेस को फायदा हुआ है. हालांकि लोगों में इस बात को लेकर रोष भी है कि पार्टी ने मंडी या कुल्लू का प्रत्याशी न देकर पुराने हिमाचल का प्रत्याशी खड़ा किया है. जहाँ कांग्रेस बेरोज़गारी और पिछली एनडीए सरकार में चले भ्रष्टाचार को लेकर प्रचार कर रही है, वहीं भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों, ख़ासकर प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व को लेकर वोट माँग रही है. यहाँ एक जबरदस्त चुनावी टक्कर होने की उम्मीद है, पर फिलहाल सिर्फ कांग्रेस का प्रचार ही ज़ोरों पर देखने को मिल रहा है. हमीरपुर ये क्षेत्र भी भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है. यहाँ से पार्टी के प्रत्याशी सुरेश चंदेल हैं जिन्हें टक्कर दे रहे हैं मौजूदा प्रदेश सरकार के मंत्री ठाकुर रामलाल. प्रदेश की यह एकमात्र ऐसी सीट है जहाँ चुनावी माहौल गर्म नज़र आ रहा है. यहाँ पर भाजपा नए और पुराने हिमाचल का मुद्दा उछाल रही है वहीं कांग्रेस पिछली एनडीए सरकार के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही है. यहाँ पर भी प्रचार रोजगार के मुद्दे पर केंद्रित है. चुनाव प्रचार में कांग्रेस, भाजपा से काफ़ी आगे चल रही है. कांग्रेस को यहाँ भाजपा की भीतरी कलह से फ़ायदा होने की उम्मीद है. शिमला ये सीट हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रही है. प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विद्या स्टोक्स इसी क्षेत्र से हैं और इस बार पार्टी के दोनों खेमे मिलकर काम कर रहे हैं. यहाँ पर भाजपा के प्रत्याशी एचएन कश्यप हैं जो कि एक नए चेहरे हैं. दूसरी ओर धनीराम शांडिल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. शांडिल पिछली बार यहाँ हिमाचल विकास कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए थे. उस समय उनकी पार्टी और भाजपा के बीच चुनावी समझौता था. ये क्षेत्र फलों, ख़ासकर सेब के उत्पादन के लिए जाना जाता है और ये उत्पादक मुख्य रूप से कांग्रेस समर्थक रहे हैं. कांग्रेस की स्थिति इस सीट पर सबसे मजबूत है. |
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