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क़ैदियों की धुन पर थिरक रहे हैं बाराती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर में इन दिनों शादी-ब्याह के अवसर पर एक नई बैंड पार्टी धूम मचा रही है, जिस की धुन सुनकर कोई भी प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सकता. लेकिन लोग उस वक्त चौंक जाते हैं जब उन्हें पता जलता है कि बैंड बाजे वाले कोई व्यवसायिक कलाकार ना होकर हत्या, डकैती और लूट जैसे गंभीर अपराधों के लिए सज़ा भुगत रहे बिलासपुर सेंट्रल जेल के कैदी हैं. दिसंबर 2003 में बिलासपुर सेंट्रल जैल में उम्रक़ैद की सज़ा भुगत रहे 16 कैदियों को लेकर आदर्श बैंड पार्टी बनाई गई. बैंड का मास्टर बनाया गया हत्या के आरोप में 10 साल की सज़ा काट रहे कन्हैया लाल को. इन क़ैदियो को जेल में ही बैंड बजाने का प्रशिक्षण दिया गया. शुरुआत में जेल के अंदर होने वाले कार्यक्रमों में इन्हें बैंड बजाने का अवसर दिया गया. सबसे महंगा बैंड फिर जेल प्रशासन ने तय किया कि आदर्श बैंड पार्टी जेल से बाहर किराए पर जा कर बैंड बजाने का काम करेगी.
बैंड का किराया तय हुआ प्रति घंटे के हजार रुपए. आज हालत ये है कि बिलासपुर सेंट्रल जैल के कैदियों की आदर्श बैंड पार्टी शहर की सबसे महंगी बैड पार्टी होने के बाद भी, सबसे व्यस्त बैंड पार्टी है. शहर के विभिन्न विवाह समारोह में इस बैंड पार्टी की लोकप्रियता इस हद तक है कि दूसरे व्यवसायिक बैंड पार्टी वालों के सामने अब काम का संकट पैदा होने लगा है. बैंड की लोकप्रियता के पीछे एक बड़ा कारण है बैंड पार्टी के कैदियों की निगरानी के लिए साथ जाने वाला पुलिस बल. बंदूकों से लैस पुलिस वाले के कारण समारोह के ‘ख़ास’ होने का एहसास तो होता ही है, सुरक्षा का इंतजाम भी मुफ्त में हो जाता है. महारत जेल के अधीक्षक एस.एस.तिग्गा कहते हैं, ''शहर के दूसरे बैंड वालों से हम जल्दी ही आगे निकल जाएंगे.'' हत्या के आरोप में सज़ा काट रहे क़ैदियों के लिए इस बैंड पार्टी में काम करना लाटरी निकलने से कम नहीं है. क़ैदी अशोक इसके कारण बताते हुए भावुक हो जाते है -''इस बैंड पार्टी के कारण ही तो हम उम्रकैद की सज़ा पाए, लोग कभी-कभी जेल से बाहर की खुली हवा में सांस ले पाते हैं.'' सुबह के 9 बजे से आदर्श बैंट पार्टी के क़ैदी अभ्यास करते हैं जो शाम तक भी चलता है. इतने कड़े अभ्यास का एक मात्र कारण है कि शादी-ब्याह के समारोह में जाने कौन सा गाना बजाने की फरमाइश कर दे. कल तक संगीत का ककहरा भी नहीं जाने वाले कैदी रविशंकर अब सिंथोसाइज़र या की-बोर्ड बजाने में इतने परांगत हो गए हैं कि किसी भी फिल्मी गाने की धुन बजाने में उन्हें कोई मुश्किल नहीं आती. आदर्श बैंड पार्टी के 'मास्टर' कन्हैया लाल ने तो तय कर लिया है कि जेल से रिहा होने के बाद वह बैंड बजाने को ही अपना व्यवसाय बनाएंगे. |
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